उत्तराखंडटिहरी गढ़वालमुनि की रेतीरामलीला

रामलीला में राजतिलक की घोषणा, दशरथ-कैकयी संवाद और केवट लीला का भावपूर्ण मंचन

श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए स्वीकार किया वनवास, राम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों को किया भावविभोर

मुनिकीरेती/टिहरी(दिलीप शर्मा): माँ गंगा रामलीला समिति (रजि.), चौदह बीघा, मुनिकीरेती की ओर से आयोजित पंचम भव्य श्रीरामलीला मंचन के चौथे दिन राजतिलक की घोषणा, दशरथ-कैकयी संवाद, राम-लक्ष्मण संवाद और केवट लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने सजीव अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा, भ्रातृ प्रेम और भक्ति के प्रसंगों को प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, नरेंद्र कैंतुरा, विनोद सकलानी, दिनेश भट्ट तथा मान चंफुवा देवता उपासक मंतोष भगवान और पुजारी संतोष भगवान ने श्रीगणेश वंदना के साथ किया।

रामलीला में भगवान श्रीराम के राजतिलक की घोषणा से अयोध्या में खुशी का माहौल छा गया। हालांकि, कैकयी द्वारा अपने वरदान मांगने के बाद घटनाक्रम बदल गया। पिता राजा दशरथ के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रभु श्रीराम ने सहर्ष वनवास स्वीकार किया। इस दौरान राम-लक्ष्मण संवाद के माध्यम से भाई के प्रति प्रेम, समर्पण और त्याग की भावना को दर्शाया गया। वहीं, केवट लीला ने प्रभु श्रीराम के प्रति केवट की अटूट श्रद्धा और भक्ति का संदेश दिया।

आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष संदीप परमार, मुख्य सलाहकार देवेंद्र दत्त जोशी, धर्माचार्य पंडित दिनेश सेमल्टी, सलाहकार मनोज मलासी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष उनियाल, उपाध्यक्ष प्रदीप सकलानी, महासचिव अनिल बडोनी, सचिव डॉ. मनीष भट्ट, कोषाध्यक्ष जितेंद्र उनियाल, संगठन मंत्री संजय पांजा, विधि सलाहकार विकास उपाध्याय, आयुष असवाल, आशीष बिजलवान, अर्पित रावत, सोनू रावत, धर्म सिंह नेगी, नवीन भंडारी और मंत्री गंगा रावत सहित समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का योगदान रहा।

Related Articles

Back to top button