
ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण एवं अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में ऋषिकेश क्षेत्र में नियमों के विपरीत किए जा रहे बहुमंजिला निर्माण पर कड़ी कार्यवाही करते हुए सीलिंग की गई।
प्राधिकरण की टीम द्वारा नियमित निरीक्षण एवं प्राप्त शिकायतों के आधार पर चिन्हित स्थलों पर प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। हाल ही में रेलवे स्टेशन के समीप आदर्श नगर क्षेत्र में सिद्धार्थ सिंघल द्वारा किए जा रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण को चिन्हित कर सील कर दिया गया।
यह कार्यवाही सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी, सुपरवाइजर एवं पुलिस बल की उपस्थिति में संपन्न हुई। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार का निर्माण या भू-उपयोग परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपाध्यक्ष का बयान
“अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं” – बंशीधर तिवारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि शहरों का सुनियोजित विकास एवं सुरक्षित आधारभूत ढांचा सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण न केवल शहरी सौंदर्य एवं मास्टर प्लान का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में जनसुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सचिव का बयान
“नोटिस के बाद भी जवाब नहीं, इसलिए हुई सीलिंग” – मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ता को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई।
सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार का निर्माण पाए जाने पर तत्काल विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जनता से अपील
निर्माण से पूर्व अनिवार्य रूप से लें मानचित्र स्वीकृति
एमडीडीए ने आमजन से अपील की है कि किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व विधिवत मानचित्र स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। नियमों के अनुरूप विकास से ही क्षेत्र का संतुलित, सुरक्षित और सुव्यवस्थित विकास संभव है।









