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परमार्थ निकेतन में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनायी गई माँ यशोदा जयंती

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने बताया मातृत्व को संस्कार और संस्कृति की आधारशिला

ऋषिकेश, 7 फरवरी (दिलीप शर्मा): परमार्थ निकेतन में माँ यशोदा जयंती के अवसर पर भक्ति, वात्सल्य और सनातन संस्कृति से ओतप्रोत वातावरण रहा। इस अवसर पर आयोजित परमार्थ गंगा आरती माँ यशोदा को समर्पित की गई।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि माँ यशोदा निस्वार्थ प्रेम, त्याग और मातृशक्ति का आदर्श स्वरूप हैं। उन्होंने मातृत्व को संरक्षण, पोषण और मार्गदर्शन की सतत प्रक्रिया बताते हुए कहा कि माँ बच्चों की प्रथम गुरु होती है।

स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में बढ़ती दूरी और तनाव के बीच माँ यशोदा का जीवन प्रेम, संस्कार और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं और माताओं से बच्चों में संवेदनशीलता, सेवा और नैतिक मूल्यों का विकास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माँ का स्थान सर्वोपरि है। मातृभूमि, मातृभाषा और गंगा माँ भी मातृत्व की अभिव्यक्ति हैं। मातृशक्ति के सम्मान से ही समाज और राष्ट्र सशक्त बनते हैं।

स्वामी जी ने परिवारों से बच्चों को तकनीक के साथ-साथ संस्कृति और परंपरा से जोड़ने की अपील की और कहा कि मातृत्व, ममता और संस्कार ही समाज में प्रेम, शांति और एकता का आधार

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