उत्तराखंडऋषिकेशबसंतोत्सव

बसंतोत्सव में रक्तदान का नया कीर्तिमान, 428 यूनिट रक्त एकत्र

स्वर्गीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की स्मृति में आयोजित शिविर ने तोड़ा 407 यूनिट का पुराना रिकॉर्ड

 

ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): बसंतोत्सव के अवसर पर स्वर्गीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज की स्मृति में आयोजित रक्तदान शिविर ने एक नया इतिहास रच दिया। शिविर में कुल 428 यूनिट रक्तदान हुआ, जिससे पूर्व में बना 407 यूनिट का रिकॉर्ड भी टूट गया। इस अभूतपूर्व सफलता ने न केवल बसंतोत्सव की गरिमा बढ़ाई, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता और सेवा भाव का सशक्त संदेश भी दिया।

शिविर में एम्स ऋषिकेश द्वारा 123 यूनिट, हिमालयन हॉस्पिटल द्वारा 126 यूनिट तथा परिवर्तन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा 179 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। तीनों संस्थाओं के समन्वय और स्वयंसेवकों के अथक प्रयास से यह रिकॉर्ड संभव हो सका।

इस अवसर पर महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने समस्त ऋषिकेशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कीर्तिमान जनसहयोग और सामूहिक संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि समाज की सेवा ही स्वर्गीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी महाराज को सच्ची श्रद्धांजलि है।

पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट ने रक्तदान को जीवनदान बताते हुए कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को हर तीन माह में रक्तदान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं है और यही किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने का माध्यम बनता है।

लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह ने कहा कि एक बार किया गया रक्तदान चार लोगों का जीवन बचा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में रक्त की बढ़ती आवश्यकता पर जोर देते हुए नियमित रक्तदान की अपील की।

कार्यक्रम में महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज, हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, दीप शर्मा, विनय उनियाल, महंत रवि शास्त्री, पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह, रंजन अंथवाल, विकास नेगी, प्रवीण रावत, विवेक शर्मा, रचित अग्रवाल, अमित चटर्जी, विनोद कोठियाल, अशोक अग्रवाल, आशु रणदेव, प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी, प्रधानाचार्य के.एल. दीक्षित सहित अनेक गणमान्य नागरिक और समाजसेवी उपस्थित रहे।

रक्तदाताओं के उत्साह, आयोजकों की सुचारु व्यवस्था और चिकित्सा टीमों की तत्परता ने इस शिविर को पूर्णतः सफल बनाया। बसंतोत्सव के अंतर्गत आयोजित यह रक्तदान शिविर निस्संदेह आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया

Related Articles

Back to top button