

पौड़ी / स्वर्गाश्रम (ऋषिकेश), 27 जुलाई- स्वर्गाश्रम स्थित गीता आश्रम में रविवार को पूज्य स्वामी वेद व्यासानंद सरस्वती जी महाराज के 118वें जन्मोत्सव के अवसर पर एक भव्य भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन में नगर व आसपास के आठ संस्कृत विद्यालयों के लगभग 35 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता का विषय था “भारतीय संस्कृति की सार्थकता”, जिस पर छात्रों ने क्रमवार प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. दीपक गुप्ता ने की, जबकि संचालन आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर गुरु जी के शिष्यों एवं विभिन्न संस्थाओं से जुड़े गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
डॉ. दीपक गुप्ता ने इस अवसर पर मिडिया से बातचीत में कहा –
“गुरु जी एक महान संत विभूति थे। उनका स्मरण मात्र ही हमारे अंदर उनके गुणों को जाग्रत करता है। आज के इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझने और प्रस्तुत करने का मंच देना था, ताकि वे समाज, धर्म और राष्ट्रहित में अपने विचार व्यक्त कर सकें।”
🏆 प्रतियोगिता के विजेता इस प्रकार रहे:
प्रथम स्थान: शिवम जोशी
द्वितीय स्थान: ओम और वंश भट्ट
तृतीय स्थान: शिव चरण नौटियाल और अक्षत गोयल
चतुर्थ स्थान: यश नारंग और साक्षी भट्ट
सभी विजेताओं को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अन्य प्रतिभागियों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास के कक्षा 11वीं के छात्र यश नारंग ने प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त कर अपने विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।
कार्यक्रम के दौरान रामचरितमानस पाठ भी आयोजित किया गया, जिससे वातावरण में भक्तिपूर्ण भाव व्याप्त हो गया।
इस विशेष मौके पर द्वाराचार्य पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु स्वामी योगानन्दाचार्य स्वामी दयाराम देवाचार्य जी महाराज को डॉ. दीपक गुप्ता द्वारा पुष्पमाला और उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया गया। अपने उद्बोधन में महाराजश्री ने कहा “यह आश्रम सदैव दीन-दुखियों के लिए समर्पित रहा है। आज यहां उपस्थित बच्चों को देखकर गर्व होता है कि ये भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक बनेंगे।”

👥 उपस्थित प्रमुख अतिथिगण:
गिरीश डोभाल (उपाध्यक्ष, मौन पालन परिषद्)
आर. ए. तिवारी (प्रबंधक, परमार्थ निकेतन)
इंद्रप्रकाश अग्रवाल
अन्य सम्मानित अतिथि व गुरु शिष्यगण
इस अवसर ने न केवल गुरुजी की शिक्षाओं को स्मरण किया, बल्कि भावी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की गरिमा और दिशा दिखाने का प्रयास भी किया। कार्यक्रम में शांति, श्रद्धा और उत्साह का समावेश देखने को मिला।
रिपोर्ट: दिलीप शर्मा, ऋषिकेश संवाददाता









