उत्तराखंडऋषिकेश

साप्ताहिक शोधन कर्म एवं त्राटक साधना अभ्यास सफलतापूर्वक सम्पन्न

योग विज्ञान विभाग में विद्यार्थियों ने सीखे ध्यान और शुद्धिकरण के रहस्य

 

ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा)16 अक्टूबर : श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश स्थित योग विज्ञान विभाग में 10 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक “त्राटक साधना एवं शोधन कर्म अभ्यास सप्ताह” का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष योग-सप्ताह में विभाग के विद्यार्थियों ने ध्यान और शुद्धिकरण की विभिन्न विधियों का अभ्यास कर मन, शरीर और आत्मा के संतुलन की साधना की।

ज्योति, नाड़ी और चक्र त्राटक बने आकर्षण का केंद्र

प्रत्येक दिन प्रातः 5:00 बजे से 7:00 बजे तक आयोजित सत्रों में विद्यार्थियों ने त्राटक ध्यान के विविध रूपों — ज्योति त्राटक, नाड़ी त्राटक और चक्र त्राटक — का अभ्यास किया। इन अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में एकाग्रता, दृष्टि-संवेदन और मानसिक स्थिरता के विकास पर बल दिया गया।

शटकर्म अभ्यास से हुई शारीरिक-मानसिक शुद्धि

त्राटक साधना के साथ-साथ विद्यार्थियों ने योग शुद्धिकरण की दृष्टि से शटकर्म क्रियाओं — नेति, कपालभाति, नौलि, धौती आदि — का भी अभ्यास किया। विभाग के शिक्षकों ने इन क्रियाओं के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की विस्तृत जानकारी दी, जिससे विद्यार्थियों में योग के प्रति नई चेतना का संचार हुआ।

अधिकारियों ने की आयोजन की सराहना

परिसर निदेशक प्रो. महाबीर सिंह रावत ने विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होते हैं।
वहीं, योग समन्वयक प्रो. वी. के. गुप्ता ने बताया कि नियमित योगाभ्यास विद्यार्थियों में न केवल आत्मनियंत्रण की भावना उत्पन्न करता है, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों से संतुलित ढंग से निपटने की शक्ति भी देता है।

त्राटक साधना एकाग्रता का श्रेष्ठ साधन — डा. कंसवाल

योग विभागाध्यक्ष डा. जयप्रकाश कंसवाल ने कहा, “त्राटक साधना व्यक्ति की दृष्टि और चित्त को एकाग्र करती है। यह योग के ध्यान अंग की उत्कृष्ट तैयारी मानी जाती है।” उन्होंने विद्यार्थियों के उत्साह और अनुशासन की सराहना की।

शोधार्थियों और शिक्षकों का रहा विशेष योगदान

इस अभ्यास सप्ताह के संचालन में विभाग के शिक्षक — डा. चंद्रेश्वरी नेगी, डा. वीना रयाल, डा. हिमानी नौटियाल — एवं विभाग के शोधार्थियों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में एम.ए. योग एवं पी.जी. डिप्लोमा के सभी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अनुभव साझा किए।

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