
देहरादून/ऋषिकेश (दिलीप शर्मा) 01 नवम्बर : विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ सीपीआर पर व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस मौके पर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आम लोगों और टीन एज के छात्र-छात्राओं को स्ट्रोक से बचाव के उपाय और इसके खतरों के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम का आयोजन एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के तत्वावधान में देहरादून स्थित सांई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की विधि का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया और स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान संबंधी उपयोगी जानकारियां साझा की गईं।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभाग की डॉ. मधुरी ने बताया कि इस वर्ष की थीम “हर मिनट मायने रखता है” (Every Minute Counts) समय पर कार्यवाही की अहमियत को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक और हृदयाघात जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई जीवनरक्षक साबित होती है।
डॉ. मधुरी ने स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान के लिए एफ.ए.एस.टी. (F.A.S.T.) फार्मूला समझाया—
- F (Face): चेहरे का एक हिस्सा ढीला पड़ जाना या हिलने में असमानता।
- A (Arms): दोनों बांहों को समान रूप से ऊपर न उठा पाना।
- S (Speech): बोली का अस्पष्ट या लड़खड़ाना।
- T (Time): तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करना।
उन्होंने कहा कि इन संकेतों को पहचानकर समय रहते इलाज शुरू करना अत्यंत जरूरी है। अपने संदेश में प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण न केवल विद्यार्थियों में जीवनरक्षक कौशल विकसित करते हैं, बल्कि समाज में आपातकालीन स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को सीपीआर की व्यवहारिक तकनीक सिखाई गई। विभाग के अर्शदीप ने बताया कि यह गतिविधि सीपीआर जागरूकता माह के अंतर्गत चलाई जा रही पहल का हिस्सा है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर की तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया।
सांई इंस्टीट्यूशन्स की प्राचार्या डॉ. संध्या डोगरा ने एम्स ऋषिकेश का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज के लिए अत्यंत लाभकारी है और लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में डॉ. आरती सहित अन्य फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
एम्स ऋषिकेश द्वारा आयोजित ऐसे आयोजनों के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता और भी सशक्त हो रही है — क्योंकि सच में, हर मिनट मायने रखता है।









