
ऋषिकेश, 01दिसंबर (दिलीप शर्मा) : परमार्थ निकेतन की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि सोमवार दोपहर 1 बजे, गीता-जयंती एवं मोक्षदा एकादशी के पावन दिन स्वामी असंगानन्द सरस्वती महाराज ने हरिद्वार में परमात्मा के श्रीचरणों में अपनी भौतिक देह का त्याग कर ब्रह्मलोक को प्रस्थान किया। वे पिछले कई महीनों से शारीरिक दुर्बलता एवं वृद्धावस्था जनित रोगों से पीड़ित थे। दिल्ली एवं अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में उपचार जारी था, परंतु अंतिम निर्णय परमात्मा का होता है—आज वे अपने दिव्य धाम को चले गए। अभी हाल ही में 15 अक्टूबर को परमार्थ परिवार ने उनका 90वाँ जन्मदिवस उत्साहपूर्वक मनाया था। उनका जाना दैवी सम्पद मंडल के लिए अपूरणीय क्षति है।

नौ वर्ष की आयु में साधु जीवन को समर्पण पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने बताया कि स्वामी असंगानन्द सरस्वती महाराज ने मात्र नौ वर्ष की उम्र में अपने जीवन को परम पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती महाराज के श्रीचरणों में समर्पित कर दिया था। प्रारम्भिक अध्ययन के लिए वे शाहजहाँपुर पधारे और तत्पश्चात परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश आए। यहाँ उन्होंने जीवनभर साधना की, अध्यापन कार्य किया और विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं को दिशा व प्रेरणा प्रदान की।
सरलता, करुणा और धर्मनिष्ठा की विरासत
उनका सरल, सहज, करुणामय व्यक्तित्व, सभी को अपनाने वाला स्वभाव, सत्संग, उपदेश, सेवा और सनातन धर्म के प्रति निष्ठा—सदैव अनुकरणीय रहेगी। दैवी सम्पद मंडल के माध्यम से उन्होंने सेवा, तपस्या, ज्ञान-विस्तार और धर्म-रक्षा की जो परंपरा स्थापित की, वह आगे भी मार्गदर्शन करती रहेगी।
परमार्थ परिवार की भावपूर्ण श्रद्धांजलि
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती तथा ऋषिकुमारों ने दो मिनट का मौन रखकर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम दर्शन 2 दिसंबर तक
आश्रम प्रशासन के अनुसार स्वामी महाराज का पार्थिव शरीर 2 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे तक परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश में दर्शनार्थ रखा जाएगा। श्रद्धालु एवं भक्त अंतिम दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
उनकी शिक्षाएँ ही सच्ची श्रद्धांजलि
आश्रम की ओर से कहा गया कि पूज्य स्वामी की शिक्षाओं, आदर्शों और उनकी ज्ञानपरंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान और भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।









