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हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग पर बड़ा हादसा राजाजी टाइगर रिज़र्व में ट्रेन की चपेट में आया शिशु हाथी, मौत; कई ट्रेनें रुकीं

हरिद्वार (दिलीप शर्मा) : देहरादून रेल खंड पर सोमवार सुबह वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। राजाजी टाइगर रिज़र्व की हरिद्वार रेंज के अंतर्गत मोतीचूर–रायवाला स्टेशन के बीच एक शिशु हाथी हावड़ा एक्सप्रेस की चपेट में आ गया। हादसा इतना अचानक था कि छोटे हाथी के पास बचने का कोई मौका नहीं रहा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

ट्रैक पार कर रहा था हाथियों का झुंड

सुबह के समय हाथियों का एक समूह जंगल से निकलकर पटरी पार कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वयस्क हाथी तो सुरक्षित निकाल गए, परंतु शिशु हाथी ट्रैक के बीच अटक गया और तभी हरिद्वार से देहरादून की ओर जा रही हावड़ा एक्सप्रेस वहां पहुँच गई। लोको पायलट के लिए ट्रेन रोकना संभव नहीं हो पाया और टक्कर हो गई।

वन अधिकारी मौके पर, जांच शुरू

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और राजाजी टाइगर रिज़र्व के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे। शिशु हाथी के शव का पंचनामा तैयार किया गया और रेल ट्रैक से हटाने की प्रक्रिया के बाद यातायात बहाल करने का प्रयास शुरू किया गया।

वन विभाग ने इस हादसे को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर ट्रेन के लोको पायलट को हिरासत में लिया गया है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि क्या ट्रेन को उस संवेदनशील वन्यजीव कॉरिडोर में निर्धारित गति से अधिक चलाया गया था।

रेल यातायात प्रभावित, कई ट्रेनें रोकी गईं

हादसे के बाद हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग करीब एक घंटे तक बाधित रहा। देहरादून से दिल्ली आनन्द विहार के लिए रवाना होने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस और उपासना एक्सप्रेस को रायवाला स्टेशन पर रोकना पड़ा। यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

भविष्य में रोकथाम के उपायों पर फोकस

राजाजी टाइगर रिज़र्व वन्यजीवों, विशेष रूप से हाथियों, का महत्वपूर्ण गलियारा है। इस क्षेत्र में पहले भी हाथियों के रेल दुर्घटनाओं में घायल होने या मौत की घटनाएँ सामने आती रही हैं। वन विभाग ने इस संवेदनशील मार्ग पर निगरानी तंत्र मजबूत करने, रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय और गति नियंत्रण जैसे उपायों को प्राथमिकता में लेने की बात कही है।

अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानव–वन्यजीव टकराव को रोकने के लिए त्वरित व प्रभावी समाधान की आवश्यकता भी याद दिलाती है।

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