उत्तराखंडऋषिकेश

बसंत उत्सव–2026 की तैयारियाँ शुरू

पहली बैठक में कार्यक्रमों की रूपरेखा तय, 21 से 25 जनवरी तक होगा चारदिवसीय आयोजन

 

ऋषिकेश, 2 दिसंबर (दिलीप शर्मा) : आगामी जनवरी 2026 में प्रस्तावित बसंत उत्सव को भव्य रूप देने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में मंगलवार को उत्सव की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें आयोजनों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई। बैठक की अध्यक्षता महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज ने की। उन्होंने कहा कि इस बार बसंत उत्सव को और व्यापक तथा आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग सांस्कृतिक, साहित्यिक तथा खेल गतिविधियों से जुड़ सकें।

चार दिनों में विविध कार्यक्रम

निर्धारित कार्यक्रम 21 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि उत्सव के दौरान साइकिल रेस, दंगल प्रतियोगिता, बैडमिंटन टूर्नामेंट, रक्तदान शिविर, मटकी फोड़, कवि सम्मेलन, बेबी शो, कला प्रतियोगिता एवं रस्साकशी जैसे आकर्षक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
साथ ही भगवान श्री भरत नारायण जी की भव्य शोभा यात्रा भी उत्सव का प्रमुख आकर्षण होगी, जिसके लिए विशेष तैयारियाँ सुनिश्चित की जाएंगी।

17 दिसंबर को होगी अगली बैठक

कार्यक्रमों के सुव्यवस्थित संचालन हेतु संयोजकों की नियुक्ति 17 दिसंबर को होने वाली अगली बैठक में की जाएगी। आयोजन से जुड़े विभिन्न आयामों—सुरक्षा, व्यवस्थापन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रचार-प्रसार—पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

 जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता रहे उपस्थित

बैठक में महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज के साथ वरुण शर्मा, विनय उनियाल, दीप शर्मा, अनीता ममंगाई, विमला रावत, मंजू बडोला, राधा रमोला, प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी, प्रधानाचार्य के.एल. दीक्षित, प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट, महंत रवि शास्त्री, प्रतीक कालिया, राकेश मियां, अशोक अग्रवाल, सुनील प्रभाकर, डीबीपीएस रावत, मनोरंजन देवरानी, धीरज चतरथ, डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, डॉ. मनीष भट्ट, अनिल बडोनी, आर.पी. भारद्वाज, रामकुमार संगर, संदीप शास्त्री, गोविंद सिंह रावत, बृजपाल राणा, धर्मेश मनचंदा, पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, प्यारेलाल जुगरान, संजय ध्यानी, पार्षद सुरेंद्र नेगी, रंजन अंथवाल, प्रवीण रावत, दीपक भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

बसंत उत्सव समिति ने सभी सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन ऋषिकेश की सांस्कृतिक पहचान को नए आयाम देगा।

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