उत्तराखंडऋषिकेश

वन विभाग के सर्वे से ऋषिकेश में चिंता का माहौल, जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मांगा समाधान

दशकों से बसे परिवारों में असुरक्षा, कार्रवाई पर रोक और स्थायी नीति की मांग

ऋषिकेश (दिलीप शर्मा): ऋषिकेश क्षेत्र में वन विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के हवाले से किए जा रहे सर्वे ने स्थानीय आबादी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अचानक शुरू हुई इस प्रक्रिया से वर्षों से रह रहे हजारों परिवारों में भविष्य को लेकर असमंजस और भय की स्थिति बन गई है। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा जिला महामंत्री प्रतीक कालिया और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल के नेतृत्व में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर जनहित में तत्काल निर्णय लेने की अपील की।

शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि जिन क्षेत्रों में सर्वे किया जा रहा है, वहां लोग लंबे समय से निवासरत हैं। अधिकतर परिवारों ने अपनी सीमित आय और जीवनभर की बचत लगाकर जमीन खरीदी और घर बनाए हैं। ऐसे में किसी स्पष्ट नीति के बिना की जा रही गतिविधियों से आमजन में बेचैनी बढ़ रही है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि जब तक राज्य सरकार इस विषय पर व्यावहारिक और न्यायसंगत नीति तय नहीं कर लेती, तब तक किसी भी प्रकार की जमीनी कार्रवाई या सर्वे को स्थगित किया जाए।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस मुद्दे के सामाजिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रभावित बस्तियों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने और भूमि से जुड़े मामलों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस पहल करने की आवश्यकता बताई।

भाजपा जिला महामंत्री प्रतीक कालिया ने कहा कि शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने के कारण स्थानीय निवासियों को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि मुख्य सचिव को आवश्यक निर्देश जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। साथ ही आगामी सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रभावित नागरिकों के हितों का प्रभावी ढंग से पक्ष रखा जाए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों को वन श्रेणी से मुक्त करने के लिए मंत्रिमंडल स्तर पर निर्णय लेने की भी मांग की।

मुलाकात के दौरान बीजेंद्र सिंह, सुभाष वाल्मीकि, प्रदीप कुमार, त्रिलोक सिंह, चंदन सिंह नेगी, अविनाश सेमल्टी, निखिल बर्थवाल, दिनेश शर्मा, राजेंद्र बिष्ट, गुरविंदर सिंह सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे। शिष्टमंडल ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री जनभावनाओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ही ऐसा निर्णय लेंगे, जिससे ऋषिकेश क्षेत्र के निवासियों को राहत मिल सके।

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