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एम्स ऋषिकेश में जूनोटिक व वायरल रोगों पर डायग्नॉस्टिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

पीसीआर, एलिसा और बायोसैफ्टी तकनीकों पर देशभर के शोधार्थियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

ऋषिकेश, 5 फरवरी (दिलीप शर्मा): एम्स ऋषिकेश में “डायग्नॉस्टिक टेक्निक्स-जूनोटिक एवं वायरल पैथोजेन्स” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों और वायरल संक्रमणों की पहचान से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में देशभर के मेडिकल कॉलेजों से आए एमएससी छात्र, पीएचडी स्कॉलर और माइक्रोबायोलॉजिस्टों ने भाग लिया। वीआरडीएल एवं वन हेल्थ प्रोग्राम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को पीसीआर, एलिसा, लैब परीक्षण और बायोसैफ्टी प्रोटोकॉल्स की जानकारी दी गई।

मुख्य अतिथि प्रो. मीनू सिंह ने वन हेल्थ एप्रोच को वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रो. प्रतिमा गुप्ता ने इसे शोध और रोग नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यशाला में व्याख्यान, केस स्टडी और हैंड्स-ऑन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया। इस दौरान उभरते वायरल संक्रमणों और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी चर्चा की गई।

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