मधुबन आश्रम में धूमधाम से मनाया गया मैंगो फेस्टिवल, आमों से सजे श्री श्री राधा-गोविंद जी के दिव्य दर्शन
ग्रीष्म ऋतु के विशेष उत्सव में श्रद्धालुओं को वितरित किया गया आम का प्रसाद, भंडारे का भी हुआ आयोजन

ऋषिकेश(दिलीप शर्मा): मधुबन आश्रम में ग्रीष्म ऋतु के अवसर पर पारंपरिक मैंगो फेस्टिवल (आम महोत्सव) का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान श्री श्री राधा-गोविंद जी महाराज का विशेष श्रृंगार विभिन्न प्रकार के रसीले आमों से किया गया, जिससे मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय एवं आकर्षक बन गया। भगवान के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और दिव्य झांकी का लाभ प्राप्त किया।

शाम की संध्या आरती के अवसर पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। जैसे ही आमों से सुसज्जित श्री श्री राधा-गोविंद जी के दर्शन हुए, पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
उत्सव के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को आम का प्रसाद वितरित किया गया तथा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में उपस्थित दानदाताओं और श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्यों में योगदान दिया और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर मधुबन आश्रम के अध्यक्ष परम पूज्य श्री परमानंद दास जी महाराज ने कहा कि भगवान को प्रत्येक वस्तु प्रिय है। भक्त जिस भाव और श्रद्धा से भगवान को भोग अर्पित करता है, प्रभु उसे सहर्ष स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंगो फेस्टिवल का उद्देश्य भगवान को ग्रीष्म ऋतु के प्रिय फलों का भोग अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करना तथा भक्तों में सेवा, भक्ति और समर्पण की भावना को जागृत करना है। यह उत्सव प्रत्येक वर्ष श्रद्धा एवं उल्लास के साथ आयोजित किया जाता है।
कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे राष्ट्रीय कथावाचक महावीर शर्मा, मुकुल शर्मा, नरेश अरोड़ा, सुनील शर्मा, सुनील कंडवाल तथा राजीव कालरा ने विशेष रूप से सहभागिता कर भगवान के दर्शन किए। इसके अतिरिक्त आनंदपुर कुटिया से पधारे संत-महात्माओं एवं उनके अनुयायियों ने भी उत्सव में शामिल होकर आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक गरिमामय बनाया।
पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के रंगों से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के आम श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता का संकल्प लिया।










