उत्तराखंडटिहरी गढ़वाल

पहाड़ों से सितारों तक: रमेश भद्री ने बनाई विज्ञान और नवाचार की नई पहचान

टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी बन रही खगोल विज्ञान, एस्ट्रो-टूरिज्म और स्वरोजगार का उभरता केंद्र

नई टिहरी, 22 जून(दिलीप शर्मा): सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों और अथक परिश्रम के बल पर टिहरी गढ़वाल के रमेश भद्री ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। आज वे उत्तराखंड के अग्रणी शौकिया खगोलविद (अमैच्योर एस्ट्रोनॉमर), एस्ट्रोफोटोग्राफर, विज्ञान शिक्षक और विज्ञान संचारक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी है।

बचपन की जिज्ञासा ने दिखाया सफलता का रास्ता

टिहरी जनपद के एक छोटे से हिमालयी गांव में पले-बढ़े रमेश भद्री बचपन से ही तारों, आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के प्रति उत्सुक थे। अखबारों और विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित खगोलीय तस्वीरें उन्हें आकर्षित करती थीं। विशेष रूप से ‘पिलर्स ऑफ क्रिएशन’ और ‘सोम्ब्रेरो गैलेक्सी’ जैसी तस्वीरों ने उनके भीतर अंतरिक्ष को समझने की जिज्ञासा पैदा की। यही जिज्ञासा आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।

स्वअध्ययन से हासिल की विशेषज्ञता

पहाड़ी क्षेत्र में खगोल विज्ञान से जुड़ी सुविधाओं के अभाव के बावजूद रमेश ने स्वयं अध्ययन कर दूरबीन संचालन, एस्ट्रोफोटोग्राफी और इमेज प्रोसेसिंग की तकनीकें सीखीं। आज वे लाखों प्रकाशवर्ष दूर स्थित आकाशगंगाओं, नीहारिकाओं और तारागुच्छों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें कैद कर रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी बनी आकर्षण का केंद्र

रमेश भद्री ने प्रतापनगर क्षेत्र में ‘टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी’ की स्थापना की है। आधुनिक दूरबीनों और वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित यह वेधशाला उत्तराखंड में खगोल विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और एस्ट्रो-टूरिज्म का उभरता हुआ केंद्र बन रही है।

वेधशाला में नियमित रूप से स्टारगेज़िंग कार्यक्रम, विज्ञान कार्यशालाएं, विद्यालयी भ्रमण और सार्वजनिक अवलोकन सत्र आयोजित किए जाते हैं। यहां आने वाले छात्र, शिक्षक और पर्यटक शनि के छल्लों, बृहस्पति के उपग्रहों तथा दूरस्थ आकाशगंगाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर विज्ञान के प्रति नई रुचि विकसित कर रहे हैं।

विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान

रमेश भद्री विज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखना चाहते। इसी उद्देश्य से वे विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में विज्ञान आधारित व्याख्यान और कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं। जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने की उनकी शैली युवाओं को विज्ञान की ओर आकर्षित कर रही है।

वैज्ञानिक अनुसंधान में भी निभा रहे भूमिका

विज्ञान के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ रमेश भद्री चर तारों (वैरिएबल स्टार्स) और एक्सोप्लैनेट ट्रांजिट के वैज्ञानिक अवलोकन भी कर रहे हैं। उनके द्वारा एकत्रित आंकड़े वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं और यह दर्शाते हैं कि समर्पित शौकिया खगोलविद भी वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

रमेश भद्री की खगोलीय तस्वीरें और उपलब्धियां विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हो चुकी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी उनके विज्ञान आधारित वीडियो और एस्ट्रोफोटोग्राफी लाखों लोगों तक पहुंच रही है, जिससे युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ रही है।

रिवर्स माइग्रेशन और रोजगार को मिल सकती है नई दिशा

जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने रमेश भद्री के नवाचारपूर्ण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य जनपद के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वहीं अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने जिला पर्यटन विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के होटल और होमस्टे में आने वाले पर्यटकों को टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी से जोड़ा जाए, ताकि वैज्ञानिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी

रमेश भद्री की यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, जिज्ञासा और निरंतर सीखने की इच्छा के सामने संसाधनों की कमी बाधा नहीं बन सकती। टिहरी की पहाड़ियों से शुरू हुई उनकी वैज्ञानिक यात्रा आज हजारों युवाओं को विज्ञान, नवाचार और स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर प्रेरित कर रही है।

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