



देहरादून(दिलीप शर्मा): सचिवालय में आयोजित ‘सशक्त बहना उत्सव’ के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों पर पहुंचकर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की गई। इस दौरान मातृशक्ति के हाथों से तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनके हुनर, मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना की गई।
उत्सव में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर की झलक देखने को मिली। इन उत्पादों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी प्रतिभा को बाजार तक पहुंचा रही हैं, बल्कि स्वरोजगार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रही हैं।
महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की पहचान हैं स्थानीय उत्पाद
इस अवसर पर कहा गया कि उत्तराखंड की नारीशक्ति द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा, हुनर और आत्मनिर्भरता की पहचान हैं। प्रत्येक उत्पाद के पीछे महिलाओं की मेहनत, लगन और अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने का संकल्प जुड़ा हुआ है।
स्थानीय उत्पादों की खरीदारी को केवल बाजार से सामान खरीदने तक सीमित न बताते हुए इसे महिला सशक्तीकरण से जोड़ते हुए कहा गया कि जब कोई व्यक्ति स्थानीय उत्पाद खरीदता है, तो उसकी खरीदारी सीधे किसी महिला के स्वाभिमान, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।
त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पादों को दें प्राथमिकता
आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की गई। कहा गया कि अपने प्रदेश के हुनर को सम्मान देना और स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को अपनाना महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा गया कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बाजार और उपभोक्ताओं का व्यापक समर्थन मिलने से मातृशक्ति के आत्मनिर्भरता के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
‘सशक्त बहना उत्सव’ जैसे आयोजनों को महिला उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों और उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






