

ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): बसंतोत्सव 2026 के अंतर्गत श्री भरत मंदिर परिसर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ स्वामी चिदानंद महाराज द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण वातावरण काव्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री शिखा दीप्ति द्वारा भावपूर्ण सरस्वती वंदना से किया गया। उनकी वाणी में मां शारदे की स्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और कवि सम्मेलन को एक पावन प्रारंभ मिला।
इसके पश्चात देश की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. अनामिका जैन अंबर ने अपनी सशक्त रचना के माध्यम से श्रोताओं में आत्मविश्वास और संघर्ष की प्रेरणा भरी। उन्होंने अपनी चर्चित कविता की पंक्तियां—
“सपनों का बोझ वहीं उठा सकते हैं अम्बर,
जिनकी रीढ़ हौसलों के दम पर खड़ी हो अम्बर।
मेरे गले में जीत की जो माला पड़ी है,
मेहनत के मोतियों से बनाई वो लड़ी है।”
का सस्वर पाठ कर खूब तालियां बटोरीं।
लोकप्रिय कवि दुर्गेश तिवारी ने गंगा की महिमा का गुणगान करते हुए कहा—
“हमारी आन है गंगा, शान है गंगा,
कोई मां, कोई देवी है बुलाता।
सनातन की पहचान है गंगा।”
उनकी इन पंक्तियों ने सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की भावना को प्रबल रूप से अभिव्यक्त किया।
कवि प्रवीण पांडेय ने जीवन की संघर्षशील यात्रा को नदी के प्रवाह से जोड़ते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की—
“मीठी नदिया, जिसकी मंज़िल खारी-खारी है,
जीवन भर आराम न पाने की लाचारी है।”
उनकी कविता ने श्रोताओं को गहरे भावबोध से भर दिया।
इस अवसर पर जॉनी बैरागी, आशीष अनल और आश्विन पाण्डेय ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिदानंद महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली चेतना है। उन्होंने सभी कवियों को उनकी साहित्य साधना के लिए शुभकामनाएं दीं।
कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, श्रद्धालु और नगरवासी उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस काव्य आयोजन में हर कविता पर खूब तालियां गूंजी और श्रोताओं ने साहित्यिक रसास्वादन का भरपूर आनंद लिया।









