पद्मश्री योग गुरु स्वामी शिवानंद जी का देहावसान
पद्मश्री से सम्मानित योग गुरु स्वामी शिवानंद जी का निधन 3 मई 2025 को रात 8:45 बजे वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में हुआ

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वाराणसी ( उत्तर प्रदेश ) 04 मई : पद्मश्री से सम्मानित योग गुरु स्वामी शिवानंद जी का निधन 3 मई 2025 को रात 8:45 बजे वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में हुआ। सांस लेने में तकलीफ के कारण वे 30 अप्रैल से भर्ती थे। स्वामी जी का जन्म 8 अगस्त 1896 को बंगाल के श्रीहट्टी (वर्तमान बांग्लादेश) में एक भिक्षु ब्राह्मण गोस्वामी परिवार में हुआ। निधन के समय उनकी आयु 129 वर्ष थी, जो उनके आधार कार्ड और पासपोर्ट में दर्ज है। काशी के गंगा घाटों पर योग सिखाने वाले स्वामी जी को 2022 में योग के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

अप्रैल 2024 में स्वामी जी अपने 50 सहयोगियों और भक्तों के साथ ऋषिकेश में श्री सीतारामदास ओंकारनाथदेव जी के हृषिकेश आश्रम पधारे। वहां उन्होंने श्री मंदिर, गंगा मंदिर, और श्री गंगेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन किए। आश्रमवासियों ने उनका माल्यार्पण, दुशाला, और गुरु साहित्य भेंट कर स्वागत किया। स्वामी जी ने लगभग दो घंटे आश्रम में बिताए, जहां उनकी विनम्रता और शांत स्वभाव ने सभी को प्रभावित किया। वे प्रत्येक प्रणाम का जवाब प्रणाम से देते थे, जो गीता के श्लोक “ममेवांशो जीवलोके, जीवभूत सनातन:” को चरितार्थ करता था।स्वामी जी सादगी के प्रतीक थे। उन्होंने कभी धन संग्रह नहीं किया, दान नहीं लिया, और दूध-फल का सेवन नहीं किया। रोगमुक्त और इच्छारहित जीवन उनकी दीर्घायु का रहस्य था। पद्मश्री ग्रहण के दौरान वे नंगे पांव राष्ट्रपति भवन पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को प्रणाम किया, जिसके जवाब में दोनों ने भी उन्हें सम्मान दिया। पुरस्कार ग्रहण के क्षण में राष्ट्रपति भवन करतल ध्वनि से गूंज उठा। स्वामी जी सच्चे कर्मयोगी थे, जिनका जीवन प्रेरणा का स्रोत है।

श्री सीतारामदास ओंकारनाथदेव जी के हृषिकेश आश्रम मुनि की रेती ( उत्तराखंड )की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।
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*পদ্মশ্রী যোগগুরু স্বামী শিবানন্দ জীর দেহাবসান*
• পদ্মশ্রী সম্মানিত যোগগুরু স্বামী শিবানন্দ জী ৩ মে ২০২৫ তারিখে রাত ৮:৪৫-এ বারাণসীর বিএইচইউ হাসপাতালে প্রয়াত হয়েছেন। শ্বাসকষ্টের কারণে তিনি ৩০ এপ্রিল থেকে ভর্তি ছিলেন।স্বামী জীর জন্ম ৮ আগস্ট ১৮৯৬ সালে বাংলার শ্রীহট্টে (বর্তমান বাংলাদেশ) এক ভিক্ষু ব্রাহ্মণ গোস্বামী পরিবারে। মৃত্যুকালে তাঁর বয়স ছিল ১২৯ বছর, যা তাঁর আধার কার্ড ও পাসপোর্টে উল্লিখিত। কাশীর গঙ্গা ঘাটে যোগ শিক্ষা দেওয়া স্বামী জী ২০২২ সালে যোগের ক্ষেত্রে অবদানের জন্য পদ্মশ্রী সম্মানে ভূষিত হন।
এপ্রিল ২০২৪-এ স্বামীজি তাঁর ৫০ জন সহযোগী এবং ভক্তদের সঙ্গে ঋষিকেশে শ্রী সীতারামদাস ওঙ্কারনাথদেব জী-র হৃষিকেশ আশ্রমে পদার্পণ করেন। তিনি শ্রী মন্দির, গঙ্গা মন্দির ও শ্রী গঙ্গেশ্বর মহাদেব মন্দিরের দর্শন করেন। আশ্রমবাসীরা তাঁকে মাল্যদান, দোপাট্টা ও গুরুর সাহিত্য উপহার দিয়ে স্বাগত জানান। প্রায় দুই ঘণ্টা আশ্রমে থাকার সময় তাঁর নম্রতা ও শান্ত স্বভাব সকলকে মুগ্ধ করে। তিনি প্রতিটি প্রণামের উত্তরে প্রণাম করতেন, যা গীতার শ্লোক “মমৈবাংশো জীবলোকে, জীবভূত সনাতন:” প্রতিপাদন করে।স্বামী জী ছিলেন সরলতার প্রতীক। তিনি কখনো ধন সঞ্চয় করেননি, দান গ্রহণ করেননি, দুধ-ফল খাননি। রোগমুক্ত ও ইচ্ছাহীন জীবনই তাঁর দীর্ঘায়ুর রহস্য ছিল। পদ্মশ্রী গ্রহণের সময় তিনি খালি পায়ে রাষ্ট্রপতি ভবনে এসেছিলেন। তিনি প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদী ও রাষ্ট্রপতি রাম নাথ কোবিন্দকে প্রণাম করেন, যার উত্তরে উভয়েই তাঁকে সম্মান জানান। পুরস্কার গ্রহণের মুহূর্তে রাষ্ট্রপতি ভবন করতালিতে মুখরিত হয়।স্বামী জী ছিলেন সত্যিকারের কর্মযোগী, যাঁর জীবন প্রেরণার উৎস।
শ্রী সীতারামদাস ওঙ্কারনাথদেব হৃষিকেশ আশ্রমের পক্ষ থেকে তাঁকে ভাবময়ী শ্রদ্ধাঞ্জলি।
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*Demise of Padma Shri Yoga Guru Swami Sivananda Ji*
Varanasi ( uttar prades ), 04 may : Padma Shri-awarded yoga guru Swami Sivananda Ji passed away on May 3, 2025, at 8:45 PM at BHU Hospital, Varanasi, where he was admitted since April 30 due to breathing difficulties.Born on August 8, 1896, in Srihatta, Bengal (now Bangladesh), in a mendicant Brahmin Goswami family, Swami Ji was 129 years old at the time of his demise, as per his Aadhaar and passport records. Known for teaching yoga on the ghats of Kashi, he was honored with the Padma Shri in 2022 for his contributions to yoga.
In April 2024, Swami Ji visited the Sri Sitaramdas Omkarnathdev’s Hrishikesh Ashram in Rishikesh with 50 associates and devotees. He offered prayers at Sri Mandir, Ganga Mandir, and Sri Gangeshwar Mahadev Mandir. The ashram residents welcomed him with garlands, a shawl, and guru literature. During his two-hour stay, his humility and serene demeanor left a profound impact. He reciprocated every salutation with a bow, embodying the Gita’s verse, “Mamaivamsho jeevaloke, jeevabhoota sanatana:” (I reside in all beings as the eternal soul). Swami Ji epitomized simplicity. He never amassed wealth, accepted donations, or consumed milk and fruits. His disease-free, desireless life was the secret to his longevity. During the Padma Shri ceremony, he arrived barefoot at Rashtrapati Bhavan, bowing to Prime Minister Narendra Modi and President Ram Nath Kovind, who reciprocated with respect. The hall echoed with applause as he received the award.A true karmayogi, Swami Ji’s life continues to inspire.
The Sri Sitaramdas Omkarnathdev’s Hrishikesh Ashram offers heartfelt tributes to him.
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