उत्तराखंडपौड़ीसुमन दिवस

अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में श्रद्धांजलि समारोह, आयुष सचिव दीपेंद्र चैधरी पहुंचे आश्रम

पौड़ी/परमार्थ निकेतन(ऋषिकेश), 25 जुलाई –अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन में विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के आयुष एवं आयुष शिक्षा सचिव दीपेंद्र चैधरी (आईएएस) परमार्थ निकेतन पहुंचे और स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

गंगा आरती के पावन अवसर पर श्रीदेव सुमन जी को समर्पित विशेष श्रद्धांजलि दी गई। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने यज्ञ और मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर राज्य को हेल्थ व वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर और औषधीय परंपरा को वैश्विक मंच पर लाना होगा। उन्होंने गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में हेल्थ व वेलनेस सेंटर स्थापित कर स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का आह्वान किया।

स्वामी जी ने कहा कि उत्तराखंड को आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में केरल की तर्ज पर एक अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी बल्कि भारत को भी स्वास्थ्य पर्यटन में नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकेगा।

श्रीदेव सुमन जी की पुण्यतिथि पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने उन्हें “क्रांति की चिंगारी और चेतना का स्थायी स्रोत” बताया। उन्होंने कहा कि श्रीदेव सुमन जी का जीवन त्याग, तप, और मातृभूमि के लिए समर्पण की अद्भुत मिसाल है।

उन्होंने 84 दिनों के आमरण अनशन के बाद टिहरी जेल में प्राण त्यागे, लेकिन अत्याचार के सामने झुके नहीं। उनका बलिदान आज भी जनमानस में प्रेरणा का स्रोत है।
स्वामी जी ने कहा कि श्रीदेव सुमन जी की पुण्यतिथि केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को पुनः जागृत करने का अवसर है। उनकी स्मृति हमें यह सिखाती है कि एक अकेला व्यक्ति भी अन्याय के विरुद्ध परिवर्तन की मशाल जला सकता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने संदेश दिया —

“राष्ट्र से बड़ा कोई धर्म नहीं और सेवा से बड़ी कोई साधना नहीं। अमर शहीद श्रीदेव सुमन जी का जीवन प्रेरणा का स्थायी स्रोत है, जिनके आदर्शों को आत्मसात कर ही हम एक जागरूक, सशक्त और सुसंस्कृत भारत का निर्माण कर सकते हैं। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

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