एम्स ऋषिकेश में बुजुर्ग मरीज की जान बचाने वाली कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग

एम्स ऋषिकेश, 03 अगस्त – ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोसर्जन और कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों की टीम ने 70 वर्षीय मरीज पर आंतरिक कैरोटिड आर्टरी (आईसीए) स्टेंटिंग की जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। मरीज की नस 90% तक सिकुड़ चुकी थी और उन्हें पूर्व में स्ट्रोक भी हो चुका था।

चिकित्सकों के अनुसार बाईं कैरोटिड आर्टरी के बंद होने से बड़े स्ट्रोक का खतरा था। इस स्थिति में बैलून एंजियोप्लास्टी कर धातु का स्टेंट लगाया गया और प्रोटेक्टिव फिल्टर का इस्तेमाल किया गया ताकि मस्तिष्क को कोई नुकसान न पहुंचे। यह संपूर्ण प्रक्रिया जाग्रत अवस्था में की गई और आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को निशुल्क इलाज मिला।
प्रक्रिया में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. निशांत गोयल और उनकी टीम, कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. सुवेन कुमार सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए टीम को बधाई दी।
इलाज के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर तीसरे दिन डिस्चार्ज हो गए। चिकित्सकों ने बताया कि अगले छह महीने तक उन्हें ब्लड थिनर दवाएं लेनी होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर साल लाखों लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं और समय पर कैरोटिड स्टेंटिंग जैसी आधुनिक तकनीक गंभीर स्ट्रोक को टाल सकती है।









