स्पर्श हिमालय महोत्सव-2025 : साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम
थानो (देहरादून) स्थित लेखक गांव में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का शुभारंभ, संतों, विद्वानों व कलाकारों की गरिमामयी उपस्थिति

ऋषिकेश (दिलीप शर्मा) 4 नवम्बर : हिमालय की पवित्र गोद में स्थित लेखक गांव, थानो में “स्पर्श हिमालय महोत्सव-2025” का भव्य शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति और कला महोत्सव परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी के सान्निध्य तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी के मार्गदर्शन में आरंभ हुआ।

महोत्सव में कानून एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, पूर्व राष्ट्रपति, मॉरिशस श्री पृथ्वीराज सिंह रूपन, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत, गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के कुलाधिपति प्रो. डी. पी. सिंह सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कलाकारों, समाजसेवियों और चिंतकों ने सहभागिता की।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि “उत्तराखंड लेखन, गायन और शास्त्र की जननी है।” उन्होंने हिमालय को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि चेतना का केंद्र और संस्कृति का अखंड आधार बताया।

डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि “हिमालय केवल भारत की शान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक रीढ़ है। इसका संरक्षण हम सबका धर्म है।”
महोत्सव के दौरान कैलाश खेर ने अपनी भक्ति-प्रधान प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विविध सत्रों में साहित्यकारों व विद्वानों ने भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और सतत विकास जैसे विषयों पर सारगर्भित विचार रखे।
यह आयोजन “पर्यावरण-आधारित सांस्कृतिक पुनर्जागरण” की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृति और हिमालय की मूल चेतना से जोड़ने का संदेश देता है।










