
ऋषिकेश, 10 नवम्बर (दिलीप शर्मा) : विश्व विज्ञान दिवस-शांति एवं विकास के अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में ‘गंगा सस्टेनेबिलिटी रन’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन परमार्थ निकेतन और विवेकानन्द यूथ कनेक्ट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में हुआ।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर मानवता, शांति और सतत विकास का साधन बने। भारतीय संस्कृति सदैव विज्ञान को अध्यात्म और नैतिकता के साथ जोड़कर देखती आई है।
स्वामी जी ने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरणीय संकट और युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब विज्ञान को शांति और संरक्षण का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने भारतीय परंपरा में विज्ञान, विवेक और मूल्य के समन्वय को वास्तविक प्रगति का आधार बताया।
‘गंगा सस्टेनेबिलिटी रन’ का उद्देश्य जनसमुदाय को मां गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी स्थिरता के महत्व के प्रति जागरूक करना है। यह रन 10, 21.1, 35 और 50 किलोमीटर की दूरी पर आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रकृति, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम अनुभव किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने डा. राजेश सर्वज्ञ, अध्यक्ष विवेकानन्द यूथ कनेक्ट फाउंडेशन का अभिनंदन करते हुए सभी विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए।
उन्होंने संदेश दिया कि “विज्ञान तभी सार्थक है जब वह मानवता को जोड़े, प्रकृति को बचाए और विश्व में शांति की ज्योति जलाए।”









