
ऋषिकेश, ब्रह्मपुरी (दिलीप शर्मा) : राम तपस्थली ब्रह्मपुरी आश्रम में आज जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी दयाराम देवानंदाचार्य महाराज श्री का 72वां जन्म महोत्सव बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पावन अवसर 9 दिवसीय राम कथा के समापन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों, समाजसेवियों और भक्तों ने भाग लेकर महाराज श्री को शुभकामनाएं दीं।
भव्य आयोजन में उमड़ा श्रद्धा का सागर
जन्म महोत्सव में अखिल भारतीय संघ समिति ऋषिकेश, विरक्त वैष्णव मंडल समिति ऋषिकेश, तथा रामानंदीय विरक्त वैष्णव मंडल हरिद्वार से जुड़े सभी महामंडलेश्वर, जगतगुरु, महंत एवं भक्तगण शामिल हुए।
कार्यक्रम का संचालन तुलसी मानस मंदिर के महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज ने की।
जगद्गुरु स्वामी दयाराम महाराज का संदेश
इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी दयाराम योगानंदाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा एवं हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने मां गंगा की स्वच्छता और अखंडता के प्रति भी सभी को संकल्प दिलाया।
महाराज श्री ने कहा — “हिंदू राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब सभी संप्रदाय आपसी मतभेद भुलाकर एक ध्वज के नीचे संगठित हों।”
संतों का आशीर्वचन और एकता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित सभी संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में सनातन धर्म की एकता, संप्रदायों के समन्वय, और गंगा संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने सर्वसम्मति से हिंदू राष्ट्र की स्थापना के समर्थन में अपना मत व्यक्त किया।
महामंडलेश्वरों और महंतों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख संत-महात्माओं में शामिल रहे:
महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज,
महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद महाराज,
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज,
महामंडलेश्वर दुर्गा दास महाराज,
महामंडलेश्वर वृंदावन दास महाराज,
योगी आशुतोष महाराज,
महंत रवि देव शास्त्री,
महंत दिनेश दास,
महंत करुणा शरण महाराज,
महामंडलेश्वर अजय रामदास,
महंत आलोक हरी महाराज,
तथा महामंडलेश्वर महावीर दास महाराज।
भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ समारोह
संपूर्ण कार्यक्रम में भजन-संकीर्तन, आशीर्वचन, और महाप्रसाद वितरण के साथ भक्तों ने आनंद का अनुभव किया। ब्रह्मपुरी आश्रम भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा और हर ओर “जय श्री राम” के उद्घोष सुनाई दिए।
समापन:
राम तपस्थली ब्रह्मपुरी में आयोजित यह जन्म महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन एकता, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का संकल्प पर्व बन गया, जिसमें संतों और भक्तों की एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।









