विश्व बाल दिवस: बच्चों के वर्तमान को सुरक्षित, शिक्षित और संस्कारित बनाना हम सभी की जिम्मेदारी — स्वामी चिदानन्द सरस्वती
परमार्थ निकेतन, परमार्थ विद्या मंदिर व परमार्थ नारी शक्ति केन्द्र में विविध कार्यक्रम; स्वामी चिदानन्द बोले— “बच्चे ईश्वर का जीवंत स्वरूप, आधुनिक सुविधाओं से अधिक संस्कार जरूरी”

ऋषिकेश, 20 नवंबर (दिलीप शर्मा) : विश्व चिल्ड्रन दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन सहित परमार्थ विद्या मन्दिर व परमार्थ नारी शक्ति केन्द्र में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मानवता को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बच्चे केवल परिवार की खुशियाँ ही नहीं, बल्कि राष्ट्र और विश्व का भविष्य हैं। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित, संस्कारित और समर्थ बनाने को समय की मुख्य आवश्यकता बताया।
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि बच्चे वास्तव में ईश्वर का जीवंत स्वरूप हैं। उनकी मुस्कान वातावरण को पवित्र करती है और उनके सीखने से मानवता का विस्तार होता है। भारतीय संस्कृति में बचपन को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा— “बच्चों को कार दें या न दें, पर संस्कार अवश्य दें। आधुनिक सुविधाएँ जीवन को आसान बना सकती हैं, पर चरित्र निर्माण संस्कार ही करते हैं।”
उन्होंने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानन्द के जीवन से उदाहरण देते हुए कहा कि महान व्यक्तित्व घर के वातावरण और मातृ–संस्कारों से ही तैयार होते हैं। बदलते समय और तकनीकी युग में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्यों, करुणा, जिम्मेदारी और आत्मानुशासन की उतनी ही आवश्यकता है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और इसका भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब बच्चों का बचपन भयमुक्त, सुरक्षित और संस्कारित होगा। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि दिशा, प्रेरणा और आदर्शों की रोशनी भी प्रदान की जाए।
विश्व बाल दिवस पर स्वामी जी ने समस्त बच्चों के सुख, सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।









