उत्तराखंडऋषिकेश

गीता भवन सत्संग सेवा समिति का प्रबंधक पर गंभीर आरोप, 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन

प्रेस वार्ता में कहा—सत्संगियों से दुर्व्यवहार, सेवादारों को हटाने का आरोप; जांच व प्रबंधक को हटाने की मांग

ऋषिकेश (दिलीप शर्मा): गीता भवन सत्संग सेवा समिति ने गीता भवन के वर्तमान प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाते हुए शासन-प्रशासन से उन्हें पद से हटाने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो एक जनवरी से आंदोलन किया जाएगा।

 

रविवार को गंगा रिजॉर्ट में आयोजित प्रेस वार्ता में समिति के पदाधिकारियों रोहित कुमार राव, सुरेंद्र सिंह राजपूत, राजकुमार, राजेश सिंह एवं विमला बहन ने पत्रकारों को बताया कि लगभग 100 वर्ष पूर्व जयदयाल गोयन्दका द्वारा गीता भवन की स्थापना की गई थी। गीता भवन का उद्देश्य सत्संगियों के रहने और भोजन की निशुल्क व्यवस्था करना था, जिसका निर्माण भी सत्संगियों के सहयोग से किया गया।

 

उन्होंने कहा कि गीता भवन के शिलालेख और मुख्य गेट की दीवारों पर बड़े अक्षरों में अंकित विवरण से स्पष्ट है कि यह भवन सत्संगियों, अर्थात राम-राम करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाया गया है। आरोप लगाया कि वर्तमान प्रबंधक द्वारा सत्संगियों के साथ अभद्रता, दुर्व्यवहार और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है, साथ ही मनमानी तरीके से वर्षों से सेवा दे रहे सेवादारों और कार्यकर्ताओं को हटाया गया है।

समिति ने यह भी कहा कि शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद गीता भवन के ट्रस्टी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे सत्संगियों और समिति में भारी आक्रोश है। उन्होंने शासन-प्रशासन से प्रबंधक को तत्काल हटाने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। यदि इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, तो समिति एक जनवरी से आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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