
ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): ऋषिकेश में बसंत उत्सव के पावन अवसर पर आज भगवान भरत नारायण जी की दिव्य व आलौकिक डोली श्री भरत मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत नगर भ्रमण हेतु निकली। इस दौरान संपूर्ण नगर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान भरत नारायण जी की डोली नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती चली, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

आज के दिन का विशेष धार्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि बसंत उत्सव के इसी पावन दिन भगवान भरत नारायण जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान का पूजन-अर्चन किया और सुख-समृद्धि की कामना की।

नगर भ्रमण के दौरान भगवान भरत नारायण जी महाराज के प्रतिनिधि स्वरूप श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज स्वयं भक्तों को आशीर्वाद देते हुए डोली के साथ चल रहे थे। उनके सान्निध्य में निकली इस भव्य रथ यात्रा ने श्रद्धालुओं के हृदय को भाव-विभोर कर दिया।
भगवान भरत नारायण जी महाराज के स्वागत के लिए नगरवासियों ने अपने-अपने घरों के द्वारों पर सुंदर रंगोलियां सजाईं, दीप प्रज्ज्वलित किए तथा पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरण भी किया गया।
इस दिन का एक और विशेष ऐतिहासिक महत्व है। जनश्रुति के अनुसार आदि शंकराचार्य जी महाराज ने इसी तिथि को ऋषिकेश के ग्राम देवता भगवान भरत नारायण जी की दिव्य व आलौकिक मूर्ति की स्थापना श्री भरत मंदिर में की थी। इसी स्मृति में प्रतिवर्ष बसंत उत्सव के अवसर पर यह भव्य नगर भ्रमण आयोजित किया जाता है।
इस अवसर पर आयोजित रथ यात्रा में वरुण शर्मा, दीप शर्मा, विनय उनियाल, महंत रवि शास्त्री, जयेंद्र रमोला, प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी, प्रधानाचार्य के. एल. दीक्षित, प्रधानाचार्य सुरेन्द्र भट्ट, लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह, रामकृपाल गौतम, देवेंद्र प्रजापति, रंजन अंथवाल, दीपक भारद्वाज सहित सैकड़ों श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पूरे नगर में शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और “जय भरत नारायण जी महाराज” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया कि भगवान भरत नारायण जी के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही प्रगाढ़ और जीवंत है।
भक्तिमय माहौल और ऐतिहासिक परंपरा के निर्वहन के साथ आज का यह दिव्य नगर भ्रमण बसंत उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद और सांस्कृतिक गौरव से भर दिया।









