मर कर भी अमर हुए ऋषिकेश के रघु पासवान अंगदान कर पाँच लोगों को दिया नया जीवन, दो को मिली दृष्टि
एम्स ऋषिकेश में सफलतापूर्वक संपन्न हुई केडवरिक ऑर्गन डोनेशन प्रक्रिया

ऋषिकेश, 23 जनवरी (दिलीप शर्मा): यह मरकर भी अमर हो जाने की एक प्रेरणादायी मिसाल है। ऋषिकेश निवासी 42 वर्षीय रघु पासवान भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके दान किए गए अंगों से पाँच लोगों को नया जीवन और दो अन्य लोगों को दृष्टि मिलने जा रही है। ब्रेन डेड घोषित किए गए रघु पासवान के केडवरिक ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में सफलतापूर्वक पूरी की गई। यह दूसरा अवसर है जब एम्स ऋषिकेश में इस प्रकार की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड हुए रघु पासवान
मूल रूप से बिहार निवासी रघु पासवान पेशे से राजमिस्त्री थे। कुछ दिन पूर्व एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और वे नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए।
संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा ने बताया कि तमाम प्रयासों के बावजूद जब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति द्वारा जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया।
परिवार की सहमति से लिया गया अंगदान का निर्णय
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के सुपरविजन में चिकित्सकों की टीम ने परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया। इस दौरान ऋषिकेश के मेयर शम्भू पासवान ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए परिजनों की काउंसिलिंग की। परिजनों की सहमति के बाद रघु पासवान के अंगदान का निर्णय लिया गया।
पाँच को नया जीवन, दो को मिलेगी रोशनी
एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि रघु पासवान के अंगों से तीन अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती पाँच मरीजों को नया जीवन मिलेगा।
- पीजीआई चंडीगढ़ में तीन मरीजों को किडनी, लीवर और पैंक्रियाज
- एम्स दिल्ली में एक मरीज को दूसरी किडनी
- आर्मी हॉस्पिटल आर.आर. दिल्ली में एक मरीज को हृदय प्रत्यारोपित किया जाएगा।
इसके अलावा रघु पासवान ने अपनी दोनों आंखें भी दान की हैं। दोनों कॉर्निया को एम्स के आई बैंक में सुरक्षित रखा गया है, जिन्हें शीघ्र ही जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाएगा।
नौ जिलों की पुलिस की मदद से बना ग्रीन कॉरिडोर
निर्धारित समय के भीतर अंगों को संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के नौ जिलों की पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
इसमें एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, ऋषिकेश से दिल्ली और चंडीगढ़ तक का रूट शामिल था। अपराह्न समय सम्मानपूर्वक रघु पासवान का पार्थिव शरीर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
इन डॉक्टरों की रही अहम भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया में न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा के साथ डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. करमवीर, डॉ. नीति गुप्ता, डॉ. मोहित धींगरा, डॉ. लोकेश अरोड़ा, डॉ. आशीष भूते और डॉ. आनंद नागर सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे।
अंग प्रत्यारोपण इकाई के समन्वयक देशराज सोलंकी और डीएनएस जीनू जैकेब की टीम का सहयोग रहा। संस्थान के पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती और डीएमएस डॉ. रवि कुमार ने नोटो और संबंधित जिला प्रशासन व अस्पतालों से समन्वय स्थापित किया।
अंगदान महादान है : एम्स प्रशासन
एम्स प्रशासन ने बताया कि यह संस्थान में केडवरिक ऑर्गन डोनेशन का दूसरा मामला है। इससे पहले 2 अगस्त 2024 को हरियाणा निवासी एक 25 वर्षीय कांवड़िए के अंगदान की प्रक्रिया भी यहां सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी।
प्रशासन का कहना है कि रघु पासवान भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे कई लोगों को जीवनदान देकर अमर हो गए हैं। अंगदान महादान है और समाज को इसके प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।









