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गौ संरक्षण की दिशा में उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: 480 करोड़ रुपये से बनेंगी 480 नई गौशालाएं

ऋषिकेश समेत पूरे प्रदेश में निराश्रित और आवारा गौवंश के स्थायी समाधान की तैयारी, जिला स्तर पर बनेगी निगरानी समिति

 

ऋषिकेश, 1 अगस्त(दिलीप शर्मा): उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर में सड़कों पर घूम रहे निराश्रित और आवारा गौवंश की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व तथा पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के प्रयासों से राज्य सरकार ने 480 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश में 480 नई गौशालाओं के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना से ऋषिकेश सहित पूरे राज्य में आवारा पशुओं की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह जानकारी शनिवार को ऋषिकेश के आईडीपीएल स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोगा ने दी।

आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान पर सरकार का फोकस

सुरेंद्र मोगा ने कहा कि आवारा गौवंश का मुद्दा केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की फसलों, शहरी यातायात और आम नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। सरकार अब अस्थायी उपायों के बजाय दीर्घकालिक और व्यवस्थित समाधान लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 98 गौ सदन संचालित हैं, जिनमें लगभग 19 हजार गौवंश को आश्रय एवं देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त 225 ग्राम स्तरीय गौ सदनों का निर्माण भी किया जा रहा है, जहां 722 निराश्रित पशुओं को रखा गया है।

प्रत्येक गौवंश के भरण-पोषण के लिए मिलेगा अनुदान

उपाध्यक्ष ने बताया कि राज्य सरकार गौशालाओं के संचालन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक गौवंश के भरण-पोषण हेतु 40 रुपये प्रतिदिन का अनुदान प्रदान कर रही है। इससे गौशालाओं पर वित्तीय दबाव कम होगा और पशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।

मसूरी में बनेगी आधुनिक गौशाला

प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि पर्यटन नगरी मसूरी में आवारा पशुओं की समस्या गंभीर बनी हुई है। इसके समाधान के लिए 41.85 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक गौशाला निर्माण का प्रस्ताव उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड को भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि 3 अगस्त से इस प्रस्ताव पर शासन स्तर पर स्वीकृति प्रक्रिया शुरू होगी। पहले चरण में 3.80 करोड़ रुपये की लागत से 40 स्थायी बाड़ों का निर्माण मात्र 15 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे तत्काल राहत मिल सके।

हर जिले में बनेगी जिला स्तरीय समिति

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) गठित की जाएगी। समिति में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग तथा नगर निकायों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।

यह समिति गौशालाओं के निर्माण, संचालन, रखरखाव तथा नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगी, जिससे योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।

480 करोड़ रुपये का मेगा प्लान

सुरेंद्र मोगा ने बताया कि प्रदेशभर में 480 नई गौशालाओं के निर्माण के लिए 480 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इस योजना से जहां निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आवारा पशुओं को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि मानव और पशु दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक संवेदनशील, व्यवस्थित और स्थायी व्यवस्था विकसित करना है।

ये रहे मौजूद

प्रेस वार्ता में पूर्व पार्षद विजेंद्र मोगा, नवीन पांडे, ऋषभ मोगा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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