जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर नव मधुबन आश्रम में विराट संत सम्मेलन, कृष्ण भक्ति में रंगा वातावरण
जगद्गुरु उत्तराखंड पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में हुआ आयोजन, स्कूली बच्चों ने कृष्ण लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बांधा समां





ऋषिकेश (दिलीप शर्मा): श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर नव मधुबन आश्रम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण विराट संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। जगद्गुरु उत्तराखंड पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं ने सहभागिता की और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं तथा गीता के संदेश पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान नव मधुबन आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। संत सम्मेलन के साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। स्कूली बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित नृत्य, नाटिकाओं एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कृष्ण लीलाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने मोहा मन
नव मधुबन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी परमानंद दास जी महाराज ने बताया कि जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी लीलाओं और धर्म के प्रति उनके संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
संतों ने दिया धर्म, संस्कृति और मर्यादा का संदेश
विराट संत सम्मेलन में शामिल संत-महात्माओं ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। संतों ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को धर्म, कर्म, सत्य, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने गीता के संदेश को वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक बताया।
इस अवसर पर स्वामी परमानंद दास जी महाराज ने सम्मेलन में पहुंचे संतों का पुष्पहार एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
धर्म की हानि होने पर अवतरित होते हैं भगवान : स्वामी कृष्णाचार्य
जगद्गुरु उत्तराखंड पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब भगवान इस धरा पर अवतार लेकर धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए हुआ था।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, मर्यादा और धर्म के प्रति निष्ठा को मजबूत करने का पर्व है। यह पर्व मनुष्य को सेवा, समर्पण और सदाचार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया। कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश आज भी संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सत्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कई संत-महात्माओं ने की सहभागिता
विराट संत सम्मेलन में जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी दयाराम योगानंदाचार्य जी महाराज, महामंडलेश्वर ईश्वर दास जी महाराज, महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज, महंत केशव स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, पवन दास महाराज, महंत श्री अखंडानंद सरस्वती महाराज एवं महंत श्री प्रदीप जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने सहभागिता की।
सभी संतों ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में नमन करते हुए देश-प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं तथा सनातन संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सहभागिता की और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।





