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“योग पार्ट ऑफ लाइफ नहीं, वे ऑफ लाइफ है” – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का भव्य शुभारंभ, देश-विदेश से पहुंचे योग साधक; योग से शांति और स्वस्थ जीवन का संदेश

 

मुनि की रेती/टिहरी (दिलीप शर्मा): अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और महोत्सव में पहुंचे देश-विदेश के सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योग केवल जीवन का एक हिस्सा नहीं बल्कि “वे ऑफ लाइफ” है। योग के प्रति बढ़ता समर्पण पूरे वातावरण को साधना, आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा से भर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग के विभिन्न आयामों, योग आसनों और प्राकृतिक चिकित्सा को जोड़ते हुए योग साधकों को समग्र जीवनशैली का संदेश दिया जा रहा है। योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का माध्यम है। आज विश्व पटल पर योग को अपनाकर भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का गौरव बढ़ रहा है। योग जीवन में गुणात्मक सुधार लाने के साथ संतुलित जीवनशैली का आधार है और यह जाति, भाषा व धर्म के भेदों को मिटाकर मानवता को जोड़ने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड योग, अध्यात्म, साधना और प्राकृतिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। योग नगरी ऋषिकेश आज देश-विदेश में योग राजधानी के रूप में ख्याति अर्जित कर चुकी है। राज्य सरकार योग के विभिन्न आयामों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है और जन-जन को योग से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पूरी ने कहा कि उत्तराखंड की भूमि ऐसी है जहां असंभव भी संभव हो जाता है। योग हमें हमारी परंपरा और विरासत के रूप में मिला है। योग केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं बल्कि अध्यात्म, साधना और संस्कृति के माध्यम से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की साधना है। उन्होंने आगामी कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह मेला दिव्य, भव्य और नव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज विश्व के कई हिस्सों में युद्ध की स्थिति है, लेकिन योग के माध्यम से ही शांति स्थापित की जा सकती है। मां गंगा की शीतलता जीवन में शांति और सकारात्मकता प्रदान करती है। उन्होंने योग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आवश्यक बताया।

साध्वी साध्वी भगावती सरस्वती ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि मां गंगा की पावन धारा ने हमें योग, अध्यात्म और श्रेष्ठ गुरु प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका जन्म अमेरिका में हुआ, लेकिन आज वे गर्व से कह सकती हैं कि भारत उनके भीतर बसता है और यह भावना योग से ही उत्पन्न होती है।

प्रदेश के वन एवं पर्यावरण तथा भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि भारत योग की जननी है और हमने ही दुनिया को योग का अमूल्य उपहार दिया है। आज योग न केवल स्वस्थ जीवनशैली प्रदान कर रहा है बल्कि रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है।

वहीं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि योग सदैव अध्यात्म का केंद्र रहा है। अष्टांग योग के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक संतुलन प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के प्रसिद्ध संगीत समूह The Beatles के सदस्यों ने ऋषिकेश प्रवास के दौरान कई गीतों की रचना की, जिससे विश्व स्तर पर भारत और उत्तराखंड की पहचान मजबूत हुई।

महोत्सव के मेजबान निगम के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि योग, ध्यान और प्राणायाम प्राचीन ऋषि परंपरा की साधना पद्धति रहे हैं। योग नगरी ऋषिकेश आज विश्व को योग, प्राकृतिक चिकित्सा, साहसिक पर्यटन और अध्यात्म का संदेश दे रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 2500 योग साधकों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 30 देशों के करीब 250 विदेशी अतिथि महोत्सव में भाग लेकर विभिन्न योग आयामों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान गणेश वंदना, गढ़वाली, राजस्थानी और पंजाबी लोक प्रस्तुतियों के साथ-साथ “आदि योगी” सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। मंच संचालन सुनील मान सिंह और हरीश बिष्ट ने किया।

इस अवसर पर पद्मश्री बसंटी बिष्ट , मेयर ऋषिकेश शम्भू पासवान, न.पा. परि.मुनि की रेती ढालवाला

की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, उषा माता, विनीता बिष्ट, समाज सेवी बच्चन पोखरियाल, सुनील भगत सहित अनेक योगाचार्य, योग साधक और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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