
देहरादून, 8 जून(दिलीप शर्मा): देहरादून के सेलाकुई थाना क्षेत्र के भाऊवाला (सैनिक कॉलोनी) में एक विवाहिता को करीब 10 माह तक बंधक बनाकर अमानवीय शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने का गंभीर मामला सामने आया है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पीड़िता के पिता द्वारा महिला आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी का विवाह अप्रैल 2024 में हुआ था। आरोप है कि जुलाई 2025 से मई 2026 तक उसे घर के कमरे और शौचालय में बंद रखा गया तथा पर्याप्त भोजन तक नहीं दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़िता के साथ अत्यंत क्रूर व्यवहार किया गया और उसे गंभीर शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
परिजनों का आरोप है कि ससुराल पक्ष द्वारा दहेज में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इसके अलावा पीड़िता को उसके जुड़वा बच्चों से मिलने नहीं दिया गया तथा उस पर तीसरा बच्चा पैदा करने का दबाव भी बनाया गया।
शिकायत के अनुसार, जब पीड़िता के पिता बेटी से मिलने ससुराल पहुंचे तो उन्हें उससे मिलने नहीं दिया गया। बाद में स्थानीय बीडीसी सदस्य और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से पीड़िता को सुरक्षित बाहर निकाला गया। परिजनों का कहना है कि उस समय उसकी मानसिक स्थिति इतनी खराब थी कि वह दिन, तारीख और वर्ष तक भूल चुकी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने घोषणा की है कि वह 11 जून को आयोग कार्यालय में पीड़िता से स्वयं मुलाकात करेंगी। उन्होंने कहा कि पीड़िता की काउंसलिंग, समुचित चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
अध्यक्ष ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तत्काल सेलाकुई थाना प्रभारी से बातचीत की। इस दौरान मामले में हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने और पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई पर उन्होंने नाराजगी जताई।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून से सीधे वार्ता कर पति, सास और ससुर सहित सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े किसी भी साक्ष्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के दौर में दहेज के नाम पर इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों के प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति नहीं होनी चाहिए और राज्य महिला आयोग इस पूरे प्रकरण की लगातार निगरानी करते हुए पीड़िता को त्वरित न्याय और सुरक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।










