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त्रिवेणी घाट स्थित खुर्जा वाली धर्मशाला में अवैध निर्माण का आरोप, कार्रवाई न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी

धर्मशाला प्रबंधन ने प्रशासन और एमडीडीए की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं पर संरक्षण देने का लगाया आरोप

ऋषिकेश, 18 जून(दिलीप शर्मा): त्रिवेणी घाट स्थित ऐतिहासिक खुर्जा वाली धर्मशाला के मुख्य द्वार के सामने कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर धर्मशाला प्रबंधन ने जिला प्रशासन एवं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

 

गुरुवार को धर्मशाला परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्य प्रबंधक आशीष कुमार पांडेय एवं प्रबंधक निलेश मिश्रा ने बताया कि खुर्जा वाली धर्मशाला की रजिस्ट्री वर्ष 1917 में हुई थी तथा इसका संचालन सेठ सूरजमल बाबूलाल धर्मांदा एंड धार्मिक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

फूल बेचने की अनुमति का उठाया अनुचित लाभ

मुख्य प्रबंधक आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व दिवंगत ट्रस्टी सूरजमल के पोते शिवकुमार जटिया से कुछ लोगों ने धर्मशाला की खाली पड़ी भूमि पर अस्थायी रूप से फूल बेचने की अनुमति मांगी थी। मानवीय आधार पर उन्हें इसकी अनुमति दी गई, लेकिन बाद में संबंधित लोगों ने इस अनुमति का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए धर्मशाला की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि त्रिवेणी घाट की ओर खुलने वाले धर्मशाला के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप बिना किसी वैधानिक अनुमति के निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिससे धर्मशाला की संपत्ति के साथ-साथ श्रद्धालुओं एवं आमजन के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।

कई बार शिकायत के बावजूद नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

धर्मशाला प्रबंधन का कहना है कि इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन, पुलिस एवं एमडीडीए से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य द्वार के सामने मलबा और कूड़ा डाला गया है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

एमडीडीए ने जारी किया था निर्माण रोकने का नोटिस

पत्रकार वार्ता के दौरान प्रबंधक निलेश मिश्रा ने संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बताया कि एमडीडीए द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था। जांच में लगभग 15×18 फीट क्षेत्रफल में बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्य किए जाने की पुष्टि हुई थी।

इसके बाद उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) एवं 28(1) के तहत निर्माण कार्य तत्काल रोकने के लिए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया। साथ ही इस मामले में वाद संख्या UCMS/MDDA/R/0879/2026 भी दर्ज की गई।

धर्मशाला प्रबंधन का आरोप है कि विभागीय नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है, जिससे नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

‘कुछ छूटभैया नेताओं का मिला हुआ है संरक्षण’

मुख्य प्रबंधक आशीष कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि धर्मशाला की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को सत्तारूढ़ दल के कुछ स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी घाट जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर नियमों के विपरीत हो रहा निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक व्यवस्था और जनहित के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

अवैध निर्माण हटाने की मांग

धर्मशाला प्रबंधन ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि धर्मशाला की भूमि पर किए गए कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रबंधन का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होगा।

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