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गंगा में डूबे तीन लोगों के शव पशुलोक बैराज से बरामद, SDRF का सर्च अभियान जारी

फूलचट्टी, साईं घाट और चंद्रेश्वर घाट पर डूबे युवकों की हुई शिनाख्त; सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की अपील

ऋषिकेश(दिलीप शर्मा): गंगा नदी में पूर्व में डूबे व्यक्तियों की तलाश में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) का सघन सर्च एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। विशेषज्ञ डीप डाइवर्स और आधुनिक उपकरणों की सहायता से घटनास्थलों सहित संभावित स्थानों पर व्यापक खोजबीन की जा रही है।

इसी क्रम में शुक्रवार को SDRF टीम को पशुलोक बैराज के चैनल में तीन शव दिखाई दिए। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बैराज की चैन मशीन की सहायता से सावधानीपूर्वक तीनों शवों को बाहर निकाला। इसके बाद शिनाख्त के लिए परिजनों को बुलाया गया तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए शव स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिए गए।

परिजनों द्वारा की गई शिनाख्त के अनुसार बरामद शव शैलेंद्र महावर (लगभग 30 वर्ष) निवासी ग्वालियर, मध्य प्रदेश, शौर्य नागर (20 वर्ष) निवासी बिसरख जलालपुर, गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश) तथा मनीष आर्य निवासी जय विहार, नांगली, उत्तम नगर (दिल्ली) के हैं। तीनों अलग-अलग घटनाओं में गंगा नदी में डूबने के बाद लापता थे।

स्थानीय पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

SDRF ने जारी की सुरक्षा सलाह

SDRF ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे केवल चिन्हित एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें तथा किसी भी प्रतिबंधित या असुरक्षित स्थान पर नदी में प्रवेश न करें। विभाग ने कहा कि गंगा नदी का जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ सकता है, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

SDRF ने लोगों से स्थानीय प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों का पालन करने, बच्चों को नदी किनारे अकेला न छोड़ने और स्नान के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील करते हुए कहा कि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। विभाग ने कहा कि SDRF जनमानस एवं पर्यटकों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे तत्पर है, लेकिन सुरक्षित व्यवहार और सावधानी ही दुर्घटनाओं की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है।

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