उत्तराखंडदेहरादून

85 वर्षीय बुजुर्ग माता के उत्पीड़न पर सख्त हुआ महिला आयोग

वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान, अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एसपी पौड़ी को दिए जांच और कठोर कार्यवाही के निर्देश

देहरादून/कोटद्वार, 25 जून(दिलीप शर्मा): कोटद्वार क्षेत्र में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला के कथित उत्पीड़न से जुड़े वायरल वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक पौड़ी गढ़वाल को तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार कोटद्वार के पूर्वी झंडीचौड़ स्थित जशोधरपुर चौकी क्षेत्र की निवासी 85 वर्षीय कुश्मा देवी ने अपने छोटे बेटे और बहू पर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बुजुर्ग महिला रोते हुए अपने साथ हो रहे कथित अमानवीय व्यवहार की जानकारी देती दिखाई दे रही हैं।

पीड़िता का आरोप है कि उनकी पेंशन की जमा पूंजी से खरीदी गई भूमि पर बने मकान में रहने के बावजूद उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में शिकायत करने के बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने दूरभाष पर पुलिस अधीक्षक पौड़ी गढ़वाल से बात कर निष्पक्ष एवं त्वरित जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी बुजुर्ग माता के साथ इस प्रकार का अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

‘बुजुर्ग समाज की धरोहर हैं’

कुसुम कंडवाल ने कहा कि वृद्ध माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक समाज की नींव एवं धरोहर हैं। देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान सर्वोपरि है और उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवनभर अपनी संतान के लिए समर्पित रहते हैं और बुढ़ापे में उन्हें सम्मान, सुरक्षा और देखभाल मिलना उनका अधिकार है।

पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश

महिला आयोग अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को केवल पारिवारिक या भूमि विवाद बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग पीड़ित महिला के साथ मजबूती से खड़ा है और दोषियों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई चाहता है जो समाज में एक सख्त संदेश दे।

उन्होंने पुलिस प्रशासन से ‘वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि बुजुर्ग महिला को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिल सके।

आयोग ने मांगी त्वरित रिपोर्ट

महिला आयोग ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही पीड़ित बुजुर्ग महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए वह पूरी गंभीरता के साथ कार्य करेगा।

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