देवदूत बनी SDRF: गीता भवन घाट पर उफनती गंगा में बह रहे कांवड़िए को जवानों ने बचाया
स्नान के दौरान पैर फिसलने से तेज धारा की चपेट में आया हरियाणा का 29 वर्षीय कांवड़िया, हेड कांस्टेबल राकेश रावत ने दिखाई अदम्य बहादुरी

ऋषिकेश, 8 अगस्त(दिलीप शर्मा): कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तैनात राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के जवानों ने एक बार फिर अपनी तत्परता और साहस का परिचय देते हुए गंगा की तेज धारा में बह रहे कांवड़िए की जान बचा ली। लक्ष्मण झूला क्षेत्र स्थित गीता भवन घाट नंबर-3 पर स्नान के दौरान पैर फिसलने से गंगा की मुख्य धारा में बह रहे कांवड़िए को SDRF जवानों ने तत्काल रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
स्नान करते समय अचानक तेज बहाव की चपेट में आया कांवड़िया
जानकारी के अनुसार, हरियाणा के झज्जर जिले के निवासी नवीन कुमार (29 वर्ष) गंगाजल लेने के लिए ऋषिकेश पहुंचे थे। शनिवार को वे गीता भवन घाट नंबर-3 पर स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गंगा के तेज बहाव की चपेट में आ गए।
तेज धारा के कारण नवीन कुमार देखते ही देखते गंगा की मुख्य धारा में बहने लगे। नदी का बहाव इतना तेज था कि उनके लिए स्वयं को संभालना मुश्किल हो गया। कांवड़िए को बहता देख घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
SDRF जवान ने जान की परवाह किए बिना गंगा में लगाई छलांग
घटना की सूचना मिलते ही कांवड़ ड्यूटी पर तैनात SDRF टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हेड कांस्टेबल राकेश रावत ने अदम्य साहस का परिचय दिया और तेज बहाव वाली गंगा में उतरकर कांवड़िए तक पहुंचने का प्रयास किया।
राकेश रावत ने अपनी जान की परवाह किए बिना बह रहे नवीन कुमार को सुरक्षित पकड़ लिया और उन्हें डूबने से बचाते हुए नियंत्रित स्थिति में रखा।
टीमवर्क से कांवड़िए को सुरक्षित निकाला गया
हेड कांस्टेबल राकेश रावत द्वारा कांवड़िए को सुरक्षित पकड़ लिए जाने के बाद घाट पर मौजूद SDRF के अन्य जवानों ने तत्काल रेस्क्यू उपकरणों और आपसी समन्वय के माध्यम से दोनों को सुरक्षित नदी से बाहर निकाला।
SDRF टीम की त्वरित कार्रवाई और साहस के चलते कांवड़िए की जान बच गई। समय रहते हुए किए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन से घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी राहत की सांस ली।
नवीन कुमार ने जताया SDRF और उत्तराखंड पुलिस का आभार
सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद नवीन कुमार ने SDRF जवानों का आभार जताया। मौके पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने भी SDRF जवानों की बहादुरी और तत्परता की सराहना की।
कांवड़ यात्रा के दौरान SDRF की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि आपदा अथवा संकट की स्थिति में उत्तराखंड पुलिस और SDRF के जवान नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी मुस्तैदी से तैनात हैं। गंगा की तेज धारा जैसे चुनौतीपूर्ण हालात में जवानों द्वारा दिखाई गई बहादुरी ने एक कांवड़िए को नया जीवन दिया।



