



ऋषिकेश, 9 सितंबर(दिलीप शर्मा): उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव श्रीमती सीमा डूंगराकोटी के निर्देशन में बुधवार को मदर टेरेसा चिल्ड्रन एकेडमी, ऋषिकेश में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम-2012 को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों तथा आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी देना रहा।
शिविर में पराविधिक कार्यकर्ता अमिता चौहान ने छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, लैंगिक उत्पीड़न तथा अन्य लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। कानून के तहत दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।

पीड़ित बच्चे की पहचान रखी जाती है गोपनीय
जागरूकता शिविर में बताया गया कि पॉक्सो कानून के तहत लैंगिक अपराधों के मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान को गोपनीय रखने का विशेष प्रावधान है। साथ ही बच्चों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने के लिए विशेष न्यायालयों की व्यवस्था की गई है। पीड़ित बच्चों को आवश्यकता के अनुसार कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग एवं अन्य सहायता उपलब्ध कराने के प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी गई।
अमिता चौहान ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए पूछा कि आखिर पॉक्सो एक्ट की आवश्यकता क्यों पड़ी। इस पर बच्चों ने अपने-अपने विचार साझा किए। इसके बाद उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में पॉक्सो अधिनियम लागू किए जाने से पहले बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों से निपटने के लिए अलग से स्पष्ट और समर्पित कानून का अभाव था। पुराने कानूनी प्रावधानों में बच्चों के विरुद्ध होने वाले विभिन्न प्रकार के यौन अपराधों की स्पष्ट परिभाषा और उनके अनुरूप पर्याप्त दंड का अभाव था।
कानूनी सहायता से लेकर चिकित्सा व काउंसलिंग तक की जानकारी
शिविर में बच्चों को बताया गया कि पॉक्सो कानून के अंतर्गत पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी भी प्रकार के अनुचित स्पर्श, व्यवहार या लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहें और तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति, शिक्षक, अभिभावक अथवा संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क करें।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100, पुलिस सहायता के लिए 100/112 तथा स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए 104 नंबर की जानकारी दी गई। बच्चों को इन हेल्पलाइन नंबरों का आवश्यकता पड़ने पर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत की भी दी जानकारी
शिविर में आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में भी छात्र-छात्राओं को जानकारी प्रदान की गई। इसके माध्यम से विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आमजन को उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता एवं न्यायिक सेवाओं के बारे में बताया गया।
पराविधिक कार्यकर्ता अमिता चौहान ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा संबंधी कानूनों की जानकारी देना अपराध की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जागरूकता के माध्यम से बच्चे किसी भी अनुचित घटना को पहचानने, उसका विरोध करने और समय रहते सहायता प्राप्त करने के लिए सक्षम बन सकते हैं।
160 से अधिक छात्र-छात्राओं ने लिया भाग
जागरूकता शिविर में 160 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती रीना जायसवाल सहित शिक्षिकाएं शिखा गोस्वामी, प्रिया भट्ट, निशा, रेखा रावत, अंजू, पूनम, गीता यादव, स्वाति, जोनी गूलवर, सरोजनी कंडवाल, प्रियंका, भूमि एवं आयुषी जायसवाल उपस्थित रहीं।
शिविर के माध्यम से छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों, लैंगिक अपराधों से सुरक्षा तथा संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के प्रति जागरूक करते हुए सुरक्षित एवं जागरूक समाज निर्माण का संदेश दिया गया।





