20 या अधिक कमरों वाले होटलों में एसटीपी-ईटीपी की जांच के लिए गठित होगी विशेष समिति
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने दिए निर्देश, गंगा संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं की हुई समीक्षा




टिहरी गढ़वाल,(दिलीप शर्मा): जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को जिला गंगा समिति की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में गंगा संरक्षण, सीवरेज परियोजनाओं, जल एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यटन गतिविधियों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने 20 या उससे अधिक कमरों वाले होटलों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए।

एसटीपी के संचालन और उपचारित जल की गुणवत्ता पर नजर रखने के निर्देश
बैठक में जनपद में संचालित एवं निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई। अगस्त 2026 की मासिक रिपोर्ट के तहत जनपद के नौ एसटीपी के इनलेट और आउटलेट जल की गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की गई। इनमें पीएच, बीओडी, टीएसएस, सीओडी और फीकल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की स्थिति शामिल रही।
रिपोर्ट के अनुसार, बौड़ बाजार, देवप्रयाग स्थित 1.4 एमएलडी क्षमता के एसटीपी और तपोवन स्थित 3.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी के आउटलेट में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 350 दर्ज किया गया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को एसटीपी के नियमित संचालन, उपचारित जल की गुणवत्ता और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले होटलों पर कार्रवाई की समीक्षा
बैठक में तपोवन और मुनि की रेती क्षेत्र में नियमों का पालन नहीं करने वाले होटलों एवं आश्रमों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में 15 होटलों और आश्रमों को नोटिस जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जारी किए गए नोटिसों और उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप अपशिष्ट उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, तपोवन के नीम बीच पर सार्वजनिक सुविधाओं और रिवर राफ्टिंग डेक के विकास के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के संबंध में भी चर्चा की गई। बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े प्रमुख न्यायिक प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।
प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर जोर
गंगा संरक्षण के उद्देश्य से नदी बेसिन में प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसमें जलस्रोतों का चिह्नीकरण एवं सूचीकरण, जल प्रवाह की स्थिति, मौसमी बदलाव, गर्मियों में जलस्रोतों के सूखने की स्थिति और पेयजल की गुणवत्ता जैसे विषय शामिल रहे।
इसके साथ ही जलस्रोतों के पुनर्भरण क्षेत्रों की स्थिति, स्थानीय समुदायों की इन पर निर्भरता तथा जलस्रोतों के क्षरण के कारणों का आकलन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। अधिकारियों को जलस्रोतों के पुनर्जीवन की संभावनाओं और गंगा के प्रवाह एवं जल गुणवत्ता पर उनके प्रभाव से संबंधित आवश्यक जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए।
सीवेज और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की होगी निगरानी
तरल अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा के दौरान जनपद में सीवेज उत्पादन, एसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशनों की स्थिति, उनकी क्षमता, उपयोग तथा उपचारित जल की गुणवत्ता से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में प्रमुख घरेलू प्रदूषण वाले नदी क्षेत्रों में जल गुणवत्ता, शौचालयों की उपलब्धता एवं उपयोग, घरों में सेप्टिक टैंक और सोख्ता गड्ढों की व्यवस्था का आकलन करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा एसटीपी से जुड़े और बिना जुड़े नालों की संख्या तथा नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचने वाले अनुपचारित सीवेज की मात्रा से संबंधित जानकारी जुटाने पर चर्चा की गई।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश
जनपद में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा करते हुए नगरीय क्षेत्रों सहित पूरे जनपद में उत्पन्न होने वाले कूड़े की मात्रा, उसके प्रकार, संग्रहण एवं परिवहन व्यवस्था तथा स्रोत पर कूड़े के पृथक्करण की स्थिति पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही कूड़े के प्रसंस्करण, निस्तारण और पुनर्चक्रण की सुविधाओं की समीक्षा की गई। अनधिकृत कूड़ा निस्तारण स्थलों, पुराने कूड़ा स्थलों और नदी किनारे कूड़ा फेंके जाने वाले स्थानों की पहचान कर उनकी स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाने की आवश्यकता भी बताई गई।
गंगा उत्सव के तहत जागरूकता कार्यक्रम और प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला
बैठक में गंगा उत्सव के अवसर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के आयोजन पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित करने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया।
जिलाधिकारी ने गंगा संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने को कहा।
अगली बैठक में सीवर कनेक्शन और सेप्टेज प्रबंधन का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने नगर पालिकाओं को सीवर लाइन से जुड़े भवनों एवं घरों की सूची तैयार कर अगली बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सेप्टेज प्रबंधन के लिए पंजीकृत वाहनों और वेंडरों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा, ताकि जनपद में सीवेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
बैठक में उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर आशीष चंद्र घिल्डियाल, गंगा समिति के अरुण उनियाल सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी भौतिक एवं ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।





