
ऋषिकेश, 14 जनवरी, (दिलीप शर्मा): मकर संक्रांति के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन गंगा तट पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों एवं योग साधकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगा स्नान कर पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। गंगा स्नान कर विदेशी सैलानी भी भावविभोर नजर आए।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुभ शुरुआत का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, नई ऊर्जा और नए संकल्पों का संदेश देती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से आत्मिक शुद्धि, पुण्य की प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ होता है।
स्वामी जी ने तिल-गुड़, खिचड़ी और पतंग उड़ाने की परंपराओं के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व कठोर परिस्थितियों में भी मिठास बनाए रखने, विविधता में एकता और जीवन में संतुलन का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि सूर्य भारतीय संस्कृति में जीवनदाता और ऊर्जा का स्रोत है तथा मकर संक्रांति हमें अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और जड़ता से जागृति की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।









