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बापुग्राम भूमि विवाद पर राज्यसभा में गूंजा जनहित का मुद्दा, महेंद्र भट्ट ने उठाई स्थायित्व की मांग

सात दशकों से बसे हजारों परिवारों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की उठी आवाज, केंद्रीय मंत्री से भी हुई मुलाकात

नई दिल्ली/ऋषिकेश(दिलीप शर्मा): राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सदन में बापुग्राम क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे वन विभाग भूमि विवाद को लेकर मजबूती से अपनी बात रखी। उन्होंने क्षेत्रवासियों को स्थायित्व प्रदान करने एवं बापुग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग पुरजोर ढंग से उठाई।

महेंद्र भट्ट ने सदन में बताया कि पिछले लगभग सात दशकों से हजारों परिवार उक्त क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। यहां से नगर निगम को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके साथ ही सरकार की कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं भी क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि वह क्षेत्रवासियों को कानूनी स्थायित्व प्रदान करे।

उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां रह रहे नागरिक अनिश्चितता के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से उचित नहीं है। इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है।

इधर, हरिद्वार लोकसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक राजेश जुगरान के साथ एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्या से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष क्षेत्रवासियों की पीड़ा रखते हुए जल्द समाधान की मांग की। इस दौरान भूमि विवाद, विस्थापन की आशंका और जनभावनाओं से संबंधित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

अब यह स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बापुग्राम की जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर हैं और लगातार सरकार के समक्ष उनकी आवाज उठा रहे हैं।

राज्यसभा में महेंद्र भट्ट द्वारा जिस दृढ़ता से इस मुद्दे को उठाया गया, उससे यह साफ हो गया है कि वह इस विषय को लेकर पूरी तरह संजीदा हैं और क्षेत्रवासियों को न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

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