

देहरादून,14 अप्रैल(दिलीप शर्मा): देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 11,963 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से उत्तराखंड , उत्तरप्रदेश और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी।
कॉरिडोर के शुरू होने के साथ ही अब देहरादून से दिल्ली की दूरी महज ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी नया आयाम मिलेगा।

विकास का नया ‘गेमचेंजर’
प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को उत्तर भारत के लिए ‘गेमचेंजर’ बताते हुए कहा कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन विकास का मजबूत आधार बनेगी। उन्होंने गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में लोगों का अभिवादन करते हुए विश्वास जताया कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा।
संविधान और सामाजिक मूल्यों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने B. R. Ambedkar को नमन करते हुए संविधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर देश की ‘भाग्य रेखा’ है और सड़क-रेल नेटवर्क विकास की कुंजी है।

पर्यटन और धार्मिक स्थलों को मिलेगा बढ़ावा
इस कॉरिडोर से हरिद्वार , ऋषिकेश , मसूरी और चारधाम यात्रा मार्ग जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। प्रधानमंत्री ने बारहमासी पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
साथ ही उन्होंने आगामी महाकुम्भ को भव्य बनाने की बात कही और नंदा देवी राज जात यात्रा को आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान
इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण में पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने तीर्थ स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने और कूड़ा न फैलाने की अपील भी की।
महिला सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, बल्कि उत्तर भारत में आर्थिक विकास, पर्यटन विस्तार और रोजगार सृजन के नए अवसर भी पैदा करेगा। यह परियोजना क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।










