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हेमकुण्ड साहिब यात्रा रवाना: ऋषिकेश में आध्यात्म, सेवा और राष्ट्रीय एकता का भव्य संगम

पंच प्यारों का सम्मान कर श्रद्धालुओं की संगत को दिखाई गई हरि झंडी, गूंजे “जो बोले सो निहाल” के जयघोष

 

ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): श्री हेमकुण्ड साहिब गुरुद्वारा लक्ष्मण झूला रोड़ ऋषिकेश मे दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और स्वामी चिदानंद सरस्वती, नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दीप शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में बुधवार को ऋषिकेश की पावन धरती आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा भावना और राष्ट्रीय एकता के अद्भुत वातावरण से सराबोर हो उठी। हेमकुण्ड साहिब यात्रा के लिये श्रद्धालुओं की संगत को विधिवत हरि झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर पंच प्यारों का पारंपरिक सम्मान किया गया तथा श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर संगत का अभिनंदन किया।

 

कार्यक्रम में गुरूद्वारा हेमकुण्ड साहिब प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों एवं नरेंदरजीत सिंह बिंद्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। गुरबाणी की पावन स्वर लहरियों और “जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल” के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

“हेमकुण्ड साहिब केवल तीर्थ नहीं, तप और त्याग की दिव्य भूमि” — स्वामी चिदानन्द सरस्वती

अपने आशीर्वचन में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तप, त्याग, सेवा और साहस की प्रेरणादायी भूमि है। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का सम्पूर्ण जीवन मानवता, धर्म और न्याय की रक्षा के लिये समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि आज जब विश्व हिंसा, संघर्ष और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरु गोबिंद सिंह का संदेश मानवता को जोड़ने, निर्भय बनने और धर्म के लिये खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि हेमकुण्ड यात्रा केवल पर्वतों की कठिन चढ़ाई नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन और आत्मचिंतन की यात्रा भी है, जो धैर्य, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है।

“सिख गुरुओं का बलिदान भारत की अमूल्य धरोहर” — तरणजीत सिंह संधू

इस अवसर पर तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि हेमकुण्ड साहिब यात्रा भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जहाँ आध्यात्मिकता और वीरता एक साथ चलती हैं। उन्होंने सिख गुरु परंपरा को नमन करते हुए कहा कि सिख गुरुओं का बलिदान भारत के इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

उन्होंने विशेष रूप से गुरु तेघ बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के बलिदानों को स्मरण करते हुए कहा कि धर्म और मानवाधिकारों की रक्षा के लिये उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिये सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबों ने केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिये संघर्ष किया।

गंगा, गुरबाणी और हिमालय का संगम बना शांति और सहअस्तित्व का संदेश

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिमालय की गोद में स्थित हेमकुण्ड साहिब श्रद्धालुओं को सेवा, तप, त्याग और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने वाला पवित्र धाम है। सिखों के अद्वितीय बलिदानों का स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इतिहास में ऐसे उदाहरण विरले ही मिलते हैं, जहाँ धर्म और मानवता की रक्षा के लिये पूरा परिवार समर्पित कर दिया गया हो। Guru Gobind Singh के चारों साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपराओं और विविध संस्कृतियों में निहित है। गंगा, गुरबाणी और हिमालय का यह अद्भुत संगम सम्पूर्ण विश्व को शांति, प्रेम और सहअस्तित्व का संदेश देता है।

अरदास के साथ सफल यात्रा और विश्व शांति की कामना

कार्यक्रम के समापन पर विश्व शांति, मानव कल्याण और हेमकुण्ड साहिब यात्रा की सफलता के लिये विशेष अरदास की गई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं की संगत को हरि झंडी दिखाकर यात्रा के लिये रवाना किया गया।

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