उत्तराखंडऋषिकेश

श्री भरत मंदिर, ऋषिकेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के दर्शन–आशीर्वाद

भगवान श्री हृषिकेश नारायण के दर्शन कर भक्तों को दिया आशीर्वचन

 

 

ऋषिकेश, 22 नवंबर (दिलीप शर्मा) : श्री भरत मंदिर झंडा चौक में आज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने भगवान श्री हृषिकेश नारायण भरत जी महाराज के दर्शन किए। दर्शन के उपरांत उन्होंने उपस्थित भक्तजनों को आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज द्वारा शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया गया।

हृषिकेश आध्यात्मिक साधना का पवित्र केंद्र : शंकराचार्य जी

शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि हृषिकेश वह पावन स्थली है जहां स्वयं भगवान नारायण विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि ‘हृषिकेश’ का अर्थ है—इंद्रियों को जीतने वाला, और जो अपनी इंद्रियों को वश में कर लेता है, वह ईश्वर की प्राप्ति कर लेता है।

उन्होंने कहा कि श्री भरत मंदिर में भगवान बद्रीनाथ के समान ही दिव्य दर्शन सुलभ हो जाते हैं।

मंदिर प्रबंधन और स्वच्छता की मिसाल

शंकराचार्य जी महाराज ने श्री भरत मंदिर की प्रबंध समिति की सराहना करते हुए कहा कि भारतवर्ष के सभी मंदिरों के प्रबंधक यहाँ की व्यवस्था से प्रेरणा ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि—

  • मंदिर परिसर में देखी जाने वाली स्वच्छता, भव्यता और दिव्यता अनुकरणीय है।
  • धार्मिक–सांस्कृतिक संरक्षण हेतु संस्कृत शिक्षा प्रदान करना अत्यंत सराहनीय कार्य है।

गौ रक्षा और गंगा स्वच्छता का संकल्प

शंकराचार्य जी महाराज ने गौ माता की रक्षा तथा गंगा की स्वच्छता व निर्मलता के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम इन मूल्यों की रक्षा नहीं करेंगे, भारत विश्व गुरु नहीं बन सकता।
उन्होंने सभी प्राणियों में सद्भावना और प्रेम बढ़ाने की भी प्रेरणा दी।

प्रसाद वितरण और उपस्थित जन

कार्यक्रम के अंत में शंकराचार्य जी महाराज ने सभी भक्तजनों को प्रसाद वितरण किया।

इस अवसर पर महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य जी महाराज, हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, महंत रवि शास्त्री, दीप शर्मा, जगमोहन सकलानी, भगत राम कोठारी, यमुना प्रसाद त्रिपाठी, राजेंद्र बिष्ट, गीता कुकरेती, निधि चतुर्वेदी, संस्कृत महाविद्यालय के छात्र तथा बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।

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