उत्तराखंडऋषिकेश

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ वन स्टॉप सेंटर

यौन हिंसा पीड़ित महिलाओं को अब एक ही स्थान पर मिलेगी आपातकालीन चिकित्सा, मेडिको-लीगल जांच और कानूनी सहायता

ऋषिकेश, 4 अगस्त(दिलीप शर्मा): यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और किशोरियों को त्वरित, सुरक्षित एवं सम्मानजनक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एम्स ऋषिकेश ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए अस्पताल परिसर में वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत कर दी है। इस केंद्र के माध्यम से पीड़िताओं को एक ही छत के नीचे आपातकालीन चिकित्सा, मेडिको-लीगल जांच, मनोवैज्ञानिक सहयोग और कानूनी परामर्श जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मंगलवार को अस्पताल भवन की तीसरी मंजिल पर स्थापित इस केंद्र का उद्घाटन राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल तथा एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह की उपस्थिति में किया। यह केंद्र अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग वार्ड के सामने स्थापित किया गया है, जिससे पीड़िताओं को तत्काल आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा एवं अन्य अपराधों के मामलों में प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के लिए देशभर में वन स्टॉप सेंटरों की स्थापना को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स ऋषिकेश का यह केंद्र यौन हिंसा की पीड़ित महिलाओं और किशोरियों को समय पर उपचार और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

गोपनीयता और सम्मान के साथ मिलेगी समग्र चिकित्सा सुविधा

एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में पीड़िताओं की गोपनीयता का पूर्ण ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां सुरक्षित, निजी और सम्मानजनक वातावरण में मेडिको-लीगल जांच के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पीड़िताओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

एक ही स्थान पर मिलेगी बहु-विभागीय सहायता

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर मल्टी-डिसिप्लिनरी मॉडल पर कार्य करेगा, जिसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ मिलकर पीड़िता को समग्र सहायता प्रदान करेंगे। इससे पीड़िताओं को जांच और उपचार के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उन्होंने बताया कि यह एकीकृत व्यवस्था समयबद्ध चिकित्सा, सटीक मेडिको-लीगल दस्तावेजीकरण और आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने में अत्यंत प्रभावी साबित होगी।

कई वरिष्ठ चिकित्सक और गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉ. लतिका चावला, डॉ. राजलक्ष्मी मुंदरा, डॉ. कविता खोईवाल, डॉ. ओम कुमारी, डॉ. पूनम गिल, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. दिलीप वैष्णव, डॉ. आशीष भूते, डॉ. रवि प्रकाश, संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहंती तथा भाजपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तड़ियाल सहित अनेक चिकित्सक, अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पीड़िताओं को मिलेगी त्वरित और समन्वित सहायता

एम्स ऋषिकेश में स्थापित वन स्टॉप सेंटर से यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और किशोरियों को उपचार, कानूनी प्रक्रिया और मानसिक परामर्श जैसी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इससे न केवल उपचार की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि पीड़िताओं को संवेदनशील और गरिमापूर्ण वातावरण में समुचित सहायता भी मिल सकेगी।

Related Articles

Back to top button