महा योग ध्यान कुंभ में गौरंग दास प्रभु ने दिया मानसिक शांति का संदेश
शरद पूर्णिमा ध्यान के मंच से अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 की तिथियां घोषित, काशी, त्र्यंबकेश्वर और अंबाजी में होंगे आयोजन




मुनिकीरेती/टिहरी,(दिलीप शर्मा): महा योग ध्यान कुंभ-9.0 के चौथे दिन इस्कॉन गवर्निंग बॉडी के सदस्य, गोवर्धन इको विलेज के निदेशक एवं प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता गौरंग दास प्रभु ने आधुनिक जीवन में बढ़ते मानसिक तनाव, सोशल मीडिया की लत और पारिवारिक संबंधों में आ रही चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाओं और आर्थिक प्रगति के बावजूद वास्तविक मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भगवद्गीता के ज्ञान और सनातन धर्म के सिद्धांतों से जुड़ना आवश्यक है। उन्होंने जीवन में आध्यात्मिकता, आत्मचिंतन और पारिवारिक संवाद के महत्व पर जोर देते हुए संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

इसी अवसर पर शरद पूर्णिमा ध्यान के मंच से पीएमसी हिंदी और पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) की ओर से अंतरदर्शन (Antar Darshan) इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 की तिथियों की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य आत्मचिंतन, भावनात्मक अवरोधों और मानसिक तनाव को समझने के माध्यम से प्रतिभागियों को आंतरिक परिवर्तन एवं आत्म-साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।
सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव भी जरूरी
गौरंग दास प्रभु ने कहा कि मनुष्य अपने दैनिक जीवन में परिवार, जीवनसाथी, बच्चों, घर, वाहन, धन, सामाजिक प्रतिष्ठा और करियर जैसी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है। इन दायित्वों के निर्वहन के साथ उसे आत्मा और परमात्मा के शाश्वत संबंध को समझने का प्रयास भी करना चाहिए।
उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, ध्यान और भगवद्गीता के अध्ययन से करने की सलाह दी। उनके अनुसार, नियमित आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति को रोजमर्रा की चुनौतियों, मानसिक द्वंद्व और तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में सहायता प्रदान कर सकता है।
तुलना और सोशल मीडिया की होड़ से बढ़ रहा मानसिक दबाव
युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और पारिवारिक संबंधों में आ रही चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए गौरंग दास प्रभु ने कहा कि अपेक्षाओं और वास्तविकता के बीच का अंतर मानसिक तनाव का एक प्रमुख कारण है। बच्चों की दूसरों से लगातार तुलना करना, बार-बार शिकायत करना और उनकी आलोचना करना उनके आत्मविश्वास एवं मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स की होड़ को भी युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि आभासी दुनिया में दूसरों से अपनी तुलना करने की प्रवृत्ति असंतोष और अकेलेपन की भावना को बढ़ा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने, उनकी भावनाओं को समझने और उन्हें सकारात्मक वातावरण देने का आह्वान किया।
भोग की दौड़ छोड़ योग और आध्यात्मिकता अपनाने पर जोर
भगवद्गीता में वर्णित कर्मयोग, ज्ञानयोग, अष्टांग योग और भक्तियोग की चर्चा करते हुए गौरंग दास प्रभु ने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाना नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना भी होना चाहिए।
उन्होंने परिवारों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बैठकर भोजन करने और अपने विचार साझा करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों के बीच नियमित संवाद से आपसी समझ, आत्मीयता और संबंधों में मजबूती आ सकती है।
ध्यान, पंचकोश और पिरामिड विज्ञान पर हुआ मंथन
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सौरभ रंजन और शंपा मुखर्जी ने पंचकोश, मानव चेतना के विभिन्न स्तरों तथा ध्यान के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक कल्याण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। वहीं, पिरामिड विशेषज्ञ सतीश अग्रवाल और किशोर जी ने पिरामिड विज्ञान तथा सामाजिक रूपांतरण में इसकी संभावित भूमिका पर चर्चा की।
सत्र के समापन पर पूर्व सीबीआई निदेशक डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने गौरंग दास प्रभु के संबोधन की सराहना की।
तीन आध्यात्मिक स्थलों पर होंगे अंतरदर्शन रिट्रीट
महा योग ध्यान कुंभ-9.0 के दौरान घोषित अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 के तहत देश के तीन प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन रिट्रीट का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने व्यवहार, भावनात्मक अवरोधों और मानसिक तनाव को समझने के साथ आत्मचिंतन के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरित करना है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, रिट्रीट के तीन चरण इस प्रकार होंगे:
- प्रथम चरण: 8 से 11 जनवरी 2027 तक वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश में।
- द्वितीय चरण: 15 से 19 जुलाई 2027 तक त्र्यंबकेश्वर, नासिक, महाराष्ट्र में।
- तृतीय चरण: 3 से 6 दिसंबर 2027 तक अंबाजी, गुजरात में।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मनिरीक्षण, भावनात्मक समझ और आध्यात्मिक साधना के जरिए स्वयं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
युवाओं को ध्यान से जोड़ने के लिए PYMA मीट
युवाओं में ध्यान, आत्मविकास और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीवाईएमए (पिरामिड यूथ फॉर मेडिटेशन) मीट का आयोजन 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2026 को करल, महाराष्ट्र में प्रस्तावित है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को ध्यान की उपयोगिता से परिचित कराना और उन्हें आत्मविकास के लिए प्रेरित करना है।
पीएमसी ऐप और वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी
अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 और अन्य कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी तथा पंजीकरण के लिए प्रतिभागी पीएमसी ऐप का उपयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त www.pmcglobal.org और www.pymaglobal.org पर भी संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
महा योग ध्यान कुंभ-9.0 के इस सत्र में आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान, पारिवारिक जीवन में संतुलन और आत्मचिंतन के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 की घोषणा को इसी संदेश को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।





