डीएसबी इंटरनेशनल स्कूल एवं विदेशी छात्रों का दल पहुंचा परमार्थ निकेतन
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने युवाओं को दिया जीवनमूल्यों का संदेश — सफलता, प्रसन्नता और प्रपन्नता को बताया जीवन की त्रिवेणी


ऋषिकेश (दिलीप शर्मा)23 अक्टूबर : परमार्थ निकेतन में बुधवार को डीएसबी इंटरनेशनल स्कूल और विदेशी छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। छात्रों ने विश्वविख्यात गंगा आरती में सहभाग कर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का गहन अनुभव प्राप्त किया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें जीवन के उद्देश्य, अनुशासन तथा आत्मसंयम से जीने की प्रेरणा दी।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी नहीं, जीवन को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सफल बनाती है, पर विद्या ही जीवन को सार्थक बनाती है। विद्या हमें विनम्र, संवेदनशील और जागरूक बनाती है।
स्वामी जी ने छात्रों को डिजिटल युग में “मोबाइल फास्टिंग” और “डिजिटल डिटॉक्स” अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक रूप में किया जाना चाहिए, परंतु यह लत नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा, “अपने समय का सदुपयोग करें, मोबाइल को नियंत्रित रखें, उसके द्वारा नियंत्रित न हों।”
युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने जीवन के तीन मूलमंत्र बताए— “कम खाएँ, गम खाएँ और नम जाएँ।” उन्होंने समझाया कि “कम खाएँ” का अर्थ है आहार में संतुलन, “गम खाएँ” यानी कठिनाइयों में धैर्य रखना, और “नम जाएँ” अर्थात अहंकार का त्याग कर विनम्र बनना— यही जीवन का सच्चा योग है।
स्वामी जी ने कहा कि जीवन के तीन आयाम हैं — आहार, विहार और व्यवहार। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने खानपान, जीवनशैली और व्यवहार में सादगी, संवेदना और सत्यता लाएँ।
उन्होंने सफलता, प्रसन्नता और प्रपन्नता को जीवन की “त्रिवेणी” बताते हुए कहा कि सफलता आवश्यक है, पर केवल सफलता ही पर्याप्त नहीं। “सफलता प्रभाव बढ़ाती है, पर प्रपन्नता (ईश्वर में समर्पण) हमें प्रभु भाव में जीना सिखाती है— यही शांति का द्वार है।”
साध्वी भगवती सरस्वती ने छात्रों की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कहा कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने भीतर के सत्य को पहचानना है। उन्होंने कहा कि “चुनौतियों का युग है, लेकिन भीतर की शांति, स्थिरता और करुणा से हम हर चुनौती का समाधान पा सकते हैं।”
छात्रों ने परमार्थ निकेतन की गंगा आरती में सम्मिलित होकर भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की अद्भुत झलक देखी। गंगा तट पर दीपों की लौ, मंत्रों की गूंज और श्रद्धा की तरंगों ने वातावरण को भक्ति और आनंद से ओतप्रोत कर दिया। विद्यार्थियों ने इस अनुभव को जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।









