

ऋषिकेश, 22 जुलाई 2025 – श्रीरामायण प्रचार समिति द्वारा आयोजित 40वें गोस्वामी तुलसीदास जयंती महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। इस महोत्सव का आयोजन तुलसी मानस मंदिर, ऋषिकेश में किया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

महान संतों और संतसमाज की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज एवं जगतगुरु स्वामी दयाराम दास, योगानंदाचार्य स्वामी परमानंद दास, गोपाल बाबा करुणा शरण, बंशीधर पोखरियाल, अनीता ममगाई द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
रामकथा का शुभारंभ: जीवन मूल्यों का पाठ
इस अवसर पर प्रख्यात कथा मर्मज्ञ युवराज स्वामी गोपालाचार्य महाराज ने भावपूर्ण रामकथा का शुभारंभ करते हुए कहा—
“रामायण मानव जीवन में सादगी, आदर्श, त्याग और कर्तव्य की भावना को जाग्रत करती है। भगवान श्रीराम ने संपूर्ण मानव जाति के लिए एक उच्च आदर्श स्थापित किया है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।”
भक्ति रस से सराबोर हुआ तुलसी मानस मंदिर परिसर
वेदाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा के सुमधुर संगीत संयोजन में सामूहिक रामचरितमानस पाठ ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं की आंखें छलक पड़ीं और श्रीराम के नाम की ध्वनि से संपूर्ण परिसर गूंज उठा।
सम्माननीय अतिथियों की उपस्थिति से शोभायमान हुआ आयोजन
इस दिव्य आयोजन में अनेक गणमान्य नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिनमें पूर्व राज्य मंत्री संदीप गुप्ता, विनोद कोठारी, मदन मोहन शर्मा, मनमोहन शर्मा, राजीव लोचन शर्मा, चेतन शर्मा, नवल कपूर, राजेश कुमार थपलियाल, अशोक कुमार अरोड़ा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ एवं संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
10 दिवसीय महोत्सव में होंगे विविध सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम
श्रीरामायण प्रचार समिति के अध्यक्ष महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने जानकारी दी कि यह वार्षिक उत्सव 22 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक चलेगा। दस दिवसीय महोत्सव में निम्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:
- राधा माधव संकीर्तन मंडल द्वारा भजन संध्या
- पौधारोपण कार्यक्रम
- प्रतिभा सम्मान समारोह
- धार्मिक प्रवचन एवं सत्संग
- रामचरितमानस अखंड पाठ
- श्रीराम जन्मोत्सव एवं शोभायात्रा
तुलसीदास जी का जीवन – समाज सुधार और भक्ति आंदोलन का प्रतीक
स्वामी कृष्णाचार्य जी महाराज ने तुलसीदास जयंती के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा—
“गोस्वामी तुलसीदास केवल एक महाकवि ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुद्धारकर्ता थे। उनकी रचना रामचरितमानस भारतीय समाज में मर्यादा, भक्ति और वैराग्य के मूल्यों को सुदृढ़ करती है।”
समापन समारोह में होगा भव्य भंडारा एवं संत दर्शन
31 जुलाई को महोत्सव का समापन विशाल भंडारे, भक्ति संगीत, अखंड रामधुन और संत-सम्मेलन के साथ होगा, जिसमें देशभर के अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहेंगे।
🔔 महंत रवि शास्त्री ने कहा कि तुलसी जयंती महोत्सव में सभी श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं। आइए, भक्ति के इस पावन पर्व में सहभागी बनें और अपने जीवन को राममय बनाएं। 🙏









