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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2025 : एम्स ऋषिकेश में आयोजित हुआ सीएमई और तकनीकी परामर्श सत्र

हेपेटाइटिस: आइए इसे समझें" विषय पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार, निदान और निवारण पर दिया जोर

ऋषिकेश, 28 जुलाई 2025: विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2025 के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश में “हेपेटाइटिस: आइए इसे समझें” विषय पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) सत्र एवं तकनीकी परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वायरल हेपेटाइटिस की गहराई से समझ विकसित करना, निदान व उपचार की रणनीतियों को मजबूती देना और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोगात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा प्रो. वर्तिका सक्सेना, निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह, शैक्षणिक डीन प्रो. जया चतुर्वेदी व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्यश्री बालिजा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।

सीएमई सत्र में विशेषज्ञों के विचार:

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. रोहित गुप्ता ने उत्तराखंड में यकृत रोगों के बढ़ते बोझ और सेवा वितरण की खामियों पर चर्चा की।

माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. वाई.पी. माथुरिया ने स्क्रीनिंग और निदान में नवीनतम प्रगतियों के साथ-साथ प्रयोगशाला की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

डॉ. आनंद शर्मा ने उपचार प्रोटोकॉल और लिवर ट्रीटमेंट सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता रेखांकित की।
डॉ. अजीत सिंह भदौरिया ने समुदाय स्तर पर निवारक उपायों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका पर बल दिया।

तकनीकी परामर्श सत्र में विशेषज्ञ उपस्थिति:
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के हेपेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अजय दुसेजा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने हेपेटोलॉजी में हो रही प्रगति और एकीकृत देखभाल प्रणाली को समय की जरूरत बताया।

राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. आकांक्षा निराला ने उत्तराखंड में कार्यक्रम की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की।

जनस्वास्थ्य और जागरूकता गतिविधियां भी रहीं केंद्र में:
एम्स की निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने संस्थान की जनस्वास्थ्य प्रतिबद्धताओं पर वक्तव्य दिया। डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. पूजा भदौरिया के सहयोग से संस्थान के कर्मचारियों के लिए फैटी लिवर स्क्रीनिंग कैंप भी आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन एमपीएच स्कॉलर डॉ. साक्षी ने किया। इस दौरान डॉ. आकाश सचदेवा और डॉ. आयुषी गोयल ने जागरूकता प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की और उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
निष्कर्ष:
एम्स, ऋषिकेश में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि यह जनमानस को वायरल हेपेटाइटिस जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के प्रति जागरूक करने में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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