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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग की बैठक में रखा विकसित उत्तराखण्ड का विजन

हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और पारिस्थितिकी संरक्षण पर विशेष नीति एवं दीर्घकालिक वित्तीय सहायता की उठाई मांग

नई दिल्ली/देहरादून (दिलीप शर्मा): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में उत्तराखण्ड के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण सहभागी बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उन्होंने हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी संरक्षण, आपदा प्रबंधन, कार्बन न्यूट्रैलिटी और पर्वतीय अवसंरचना विकास से जुड़े विषयों पर विशेष नीति समर्थन एवं दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-2047 का आधार मजबूत मानव पूंजी है और इसी सोच के अनुरूप उत्तराखण्ड सरकार मानव संसाधन विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार तथा युवा सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जबकि विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, वर्चुअल क्लासरूम और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और सेमीकंडक्टर तकनीक जैसे क्षेत्रों में देश के लिए अपार संभावनाएं हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार देवभूमि उद्यमिता विकास योजना, स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आईटीआई संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने जैसी महत्वाकांक्षी पहलें संचालित कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखण्ड” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। पिछले वर्षों में 30 से अधिक नई नीतियों के माध्यम से कृषि, उद्योग, पर्यटन, ऊर्जा और सेवा क्षेत्र को एकीकृत करते हुए विकास का समन्वित मॉडल तैयार किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम राज्य की अर्थव्यवस्था, निवेश, रोजगार और प्रति व्यक्ति आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती, बागवानी, औषधीय पौधों की खेती, योग एवं वेलनेस, पर्यटन और ग्रीन एनर्जी को भविष्य के विकास इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखण्ड को नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी, वेलनेस इकोनॉमी और सतत विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिमालय, गंगा, यमुना और राज्य के विशाल वन क्षेत्र केवल उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में हिमालयी राज्यों के लिए जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी संरक्षण, आपदा प्रबंधन, कार्बन न्यूट्रैलिटी, ग्रीन एनर्जी और पर्वतीय अवसंरचना विकास से जुड़े विषयों पर विशेष नीति और स्थायी वित्तीय व्यवस्था समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने सुशासन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि परिवार पहचान योजना, खनन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी प्रणाली, भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया का ऑनलाइन सरलीकरण तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़े सुधारों ने शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। उन्होंने कहा कि पिरूल आधारित ऊर्जा उत्पादन जैसे नवाचार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अमृतकाल के लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए विश्व की अग्रणी शक्तियों में अपना स्थान और अधिक मजबूत करेगा तथा उत्तराखण्ड भी इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी पूरी ऊर्जा, क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ योगदान देता रहेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 12 वर्ष के रिकॉर्ड कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक जनादेश प्राप्त कर निरंतर राष्ट्रसेवा का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सहित नीति आयोग के सभी सदस्यों को अगले वर्ष उत्तराखण्ड में आयोजित होने वाले कुंभ मेले एवं नन्दा राजजात यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।

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