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श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया हरेला महापर्व, वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

एनसीसी कैडेटों, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने लगाया पौधारोपण अभियान में उत्साहपूर्वक योगदान, "एक पेड़ माँ के नाम" का लिया संकल्प

ऋषिकेश, (दिलीप शर्मा): उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर गुरुवार को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज, ऋषिकेश में उत्साह और उल्लास के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी के निर्देशन तथा वरिष्ठ एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस अवसर पर एनसीसी कैडेटों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अतिथियों ने विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य यमुना प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते पर्यावरणीय संकट को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।

इस अवसर पर विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

वरिष्ठ एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट लखविंदर सिंह ने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” तथा “हरित उत्तराखंड, स्वच्छ उत्तराखंड” जैसे अभियानों को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने एनसीसी कैडेटों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। साथ ही कैडेटों ने अनुशासन, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए छात्रों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम में एनएसएस अधिकारी संजीव चौधरी, डा. सुनील दत्त थपलियाल, जयकृत सिंह रावत, संजीव कुमार, विकास नेगी, अजय कुमार, रंजन अंथवाल, चंद्रकला त्रिपाठी, मनोरमा रावत, कुसुम उनियाल, जितेंद्र बिष्ट, प्रवीण रावत सहित विद्यालय परिवार के अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ के साथ हुआ।

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