उत्तराखंडपौड़ी

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सख्ती: गुलदार को पकड़ने के साथ मारने तक के आदेश

स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, वन-राजस्व टीमें रहेंगी तैनात

           

पौड़ी गढ़वाल, 04 अप्रैल (दिलीप शर्मा): विकासखंड पोखड़ा क्षेत्र में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने कड़े और त्वरित कदम उठाए हैं। जनसुरक्षा, विशेषकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सक्रिय गुलदार को पकड़ने के साथ ही आवश्यक होने पर उसे मार गिराने के आदेश जारी किए गए हैं।

 

कानूनी प्रावधानों के तहत कार्यवाही 
डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव के अनुसार, क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) की धारा 11(1)(क) के अंतर्गत मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा गुलदार को पिंजरे में कैद करने और ट्रैंक्युलाईज कर पकड़ने की अनुमति दी गई है। सभी प्रयास विफल होने की स्थिति में उसे अंतिम विकल्प के रूप में मारने की भी अनुमति प्रदान की गई है।

निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा
प्रभावित क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तीन पिंजरे और 20 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा दो लाइसेंसधारी शिकारियों की तैनाती की गई है। ड्रोन सहित अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था
घटनाओं को देखते हुए 6 अप्रैल तक क्षेत्र के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। विद्यालय खुलने के बाद वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बच्चों को घर से स्कूल और वापस सुरक्षित पहुंचाने का कार्य करेंगी।

ग्रामीणों के लिए राहत उपाय
ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा पालतू मवेशियों के लिए चारा-पत्ती की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

एक माह तक प्रभावी रहेगा आदेश
यह आदेश केवल चिन्हित गुलदार के लिए मान्य होगा और जारी होने की तिथि से एक माह तक प्रभावी रहेगा। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होने तक सभी आवश्यक कदम जारी रहेंगे।

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