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ऋषिकेश प्रसूता मामले में महिला आयोग सख्त

आरोपी की पहचान कर आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश, पीड़िता के उपचार और पुनर्वास पर विशेष जोर

ऋषिकेश/टिहरी, 08 मई(दिलीप शर्मा): उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने ऋषिकेश के तपोवन क्षेत्र में सड़क किनारे एक महिला द्वारा बच्ची को जन्म देने की संवेदनशील घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को महिला की मजबूरी का लाभ उठाने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसे शीघ्र आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अस्पताल पहुंचकर जाना जच्चा-बच्चा का हाल

घटना की जानकारी मिलते ही महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने तत्काल राजकीय चिकित्सालय पहुंचकर प्रसूता महिला का कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों को जच्चा-बच्चा के समुचित एवं निशुल्क उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति टिहरी के अध्यक्ष ऋषि कंडवाल भी उपस्थित रहे।

जालंधर की निवासी है पीड़िता

पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि वह मूल रूप से जालंधर की निवासी है। माता-पिता के निधन के बाद वह ऋषिकेश के एक कैफे में कार्य कर रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति के साथ संबंध बने, जिसके बाद उसने बच्ची को जन्म दिया।

जानकारी के अनुसार स्थानीय नागरिकों एवं पुलिस की सतर्कता के चलते महिला को समय रहते चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।

नवजात की सुरक्षा और महिला के पुनर्वास के निर्देश

महिला आयोग अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि नवजात बच्ची को बाल कल्याण समिति की अभिरक्षा में सुरक्षित रखा जाए। साथ ही पीड़िता के पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद उसे सम्मानजनक आवास व्यवस्था हेतु ‘नारी निकेतन’ भेजा जाए। इसके लिए उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

“महिलाओं का शोषण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं”

अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने थाना मुनि की रेती एवं पुलिस प्रशासन को निर्देशित करते हुए कहा कि महिला की विवशता का लाभ उठाकर किया गया शोषण अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि दोषी व्यक्ति की गहन जांच कर उसकी पहचान सुनिश्चित की जाए और उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

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